लखीमपुर बवाल के बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रतिमा को हटाने के बजाय बीच का रास्ता निकालना चाहिए था। लेकिन महिलाओं पर लाठीचार्ज सूचना से हालात और बिगड़ गए। इस दौरान सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती पर मोतीपुर में हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने प्रतिमा को हटाने के बजाय संवाद का रास्ता अपना होता तो बीच का रास्ता निकल सकता था। इसके बाद महिलाओं पर लाठीचार्ज सूचना से हालात और बिगड़ गए।
इस दौरान सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।स्थानीय लोगों ने बताया कि मूर्ति हटाने से पहले ग्राम प्रधान और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों को विश्वास में नहीं लिया गया। जब प्रतिमा स्थापित हो चुकी थी, तो उसे हटाने के बजाय सुरक्षा घेरे में लेकर बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था।
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सरकारी गाड़ी में लगाई आग
- फोटो : संवाद
ग्रामीणों का आरोप है कि मोतीपुर गांव में बौद्ध विहार की भूमि पर मूर्ति स्थापना को लेकर पहले से तनाव था। पुलिस ने बिना महिला पुलिस बल की मौजूदगी या उचित संवाद के मूर्ति हटवाने का प्रयास किया, जिससे हालात बिगड़े। जयंती जैसे संवेदनशील मौके पर बिना पूर्व चेतावनी या शांति समिति की बैठक के सीधी कार्रवाई को तनाव का मुख्य कारण बताया गया है।
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कार में की तोड़फोड़
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स्थानीय खुफिया इकाई भी इस स्थिति को भांपने में विफल रही। उपद्रवियों ने क्षेत्राधिकारी गोला और तहसीलदार के वाहनों में तोड़फोड़ कर उन्हें पलट दिया। दो सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिससे बांकेगंज-गोला मार्ग घंटों बाधित रहा। बचाव में आई पुलिस पर भी जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
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बवालियों ने सड़क पर पलटी कार
- फोटो : संवाद
बिना महिला कर्मियों के पहुंची थी पुलिस
आंबेडकर जयंती जैसे संवेदनशील अवसर पर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया, जबकि कानूनन महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पर्याप्त महिला पुलिस बल अनिवार्य है।
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गाड़ियों में तोड़फोड़ करते बवाली
- फोटो : संवाद
विवादित स्थल पर लगाई गई थी मूर्ति
गोला तहसील प्रशासन के मुताबिक, मोतीपुर गांव में जिस जगह मूर्ति लगाई थी, वह राजस्व अभिलेखों में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है। संबंधित स्थल पर ग्रामीणों ने प्रशासन की बिना अनुमति के मूर्ति लगाई थी। इससे सटी भूमि पर आबादी है। इस भूमि का विवाद 40 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। तहसीलदार भीमचंद ने बताया कि गोला बांकेगंज मुख्य मार्ग के किनारे ग्रंट नंबर 10 में गाटा संख्या 1167 रकबा 0.061 हेक्टेयर खाद गड्ढे की सरकार जमीन है। जिस पर पुलिस द्वारा कब्जे की शिकायत चार-पांच दिन पहले की गई थी, जिसकी पैमाइश कराकर निशान देही भी कर दी गई थी। आज शाम 3:00 से 4:00 के करीब कुछ लोगों ने बाबा साहब की छोटी सी मूर्ति रख दी थी। जिसे हटाने के लेकर लोगों में असंतोष था। मैं अभी मौके पर ही हूं।
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बवालियों ने गाड़ियों में की तोड़फोड़
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मैलानी थानाध्यक्ष, चौकी इंचार्ज समेत कई घायल
अंबेडकर प्रतिमा को हटाने और क्षतिग्रस्त करने की सूचना इस तेजी से फैली कि पुलिस को भी तैयारी का ज्यादा समय नहीं मिला। संसारपुर चौकी से सूचना मिलते ही मैलानी और फिर गोला थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या के आगे पुलिस की मौजदूगी पर्याप्त नहीं थी। पुलिस की चेतावनी के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने बवाल के बीच मैलानी पुलिस पर अचानक पथराव करना शुरू कर दिया। इस पथराव में थानाध्यक्ष ब्रजेश सिंह मौर्य, चौकी इंचार्ज बांकेगंज संतोष तिवारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
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घटनास्थल पर मौजूद डीएम और एसपी
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शरारती तत्वों ने बिगाड़ा माहौल, पुलिस कर रही पहचान
लखीमपुर खीरी की पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग ने पूरे घटनाक्रम को लेकर अमर उजाला से बात की। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन पर कुछ शरारती तत्त्वों ने बिना किसी अनुमति डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने की कोशिश की गई जिसका विरोध उसी बिरादरी की महिला ने किया। पुलिस पूरे समय मौके पर मौजूद रही और बीस लोगों को हिरासत में लिया गया।
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बांकेगंज में जुटी भीड़
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एसपी ने बताया कि पूरे घटनाक्रम को लेकर एएसपी पश्चिमी को जांच का आदेश दिया गया है। एक मामला पीड़ित महिला की ओर से और दूसरा मामला पुलिस की ओर से दर्ज किया जा रहा है। अब तक बीस लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। घटना के दौरान स्थानीय पुलिसबल मौके पर मौजूद था। सूचना पर तत्काल ही एएसपी व सीओ तक पहुंच गए।
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बांकेगंज में जुटी भीड़
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अफवाह फैलाने वालों से निपटेंगे
एसपी ने कहा कि इस घटना को लेकर सोशल मीडिया के जरिये कई तरह की अफवाह फैलाई जा रही हैं। महिला की मौत, सीओ का घायल और गुरुद्वारे में घुसकर पुलिस टीम का जान बचाना जैसी बातें माहौल में तैर रही हैं जिनका कोई सिर पैर नहीं है। कोई पुलिस अधिकारी या कर्मचारी मौके से नहीं भागा। कुछ पुलिसकर्मियों को हल्की चोट लगी हैं।
डीएम बोलीं- महिला ने खुद बताई हकीकत
खीरी की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने अमर उजाला को बताया कि खाद के गड्ढे वाली सरकारी जमीन पर प्रतिमा स्थापित करके कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जो सफल नहीं हो सकी। खुराफातियों ने अपने ही समुदाय की महिला चंदा देवी के विरोध करने पर उन्हीं पर हमला कर दिया। मामले में खुद पीड़ित महिला की ओर से वीडियो वायरल कर अपनी पीड़ा बताई गई है। गांव में लगभग एक ही समाज के लोगों की 80 फीसदी आबादी है। इनमें तमाम संभ्रांत लोग हैं जो शुरू से पुलिस प्रशासन की नीति के साथ थे और बाद में भी साथ खड़े हैं। खुराफातियों पर पूरी सख्ती की जाएगी।