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लखीमपुर हादसा: बीच रास्ते में ही थम गई 10 लोगों की जिंदगी, किसी ने बेटा खोया तो किसी ने मां और पिता

Tue, 19 May 2026 01:59 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

लखीमपुर खीरी के ईसानगर क्षेत्र में सोमवार को हाईवे पर भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें 10 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा है। हादसे में किसी ने बेटा खोया तो किसी ने मां व पिता। ये हादसा इन परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे गया। 
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लखीमपुर खीरी में हुआ दर्दनाक सड़क हादसा - फोटो : संवाद
लखीमपुर खीरी के ईसानगर क्षेत्र में सोमवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। हादसे में जान गंवाने वाले 10 लोगों में अधिकांश अपने घर लौट रहे थे। कोई मजदूरी करके आ रहा था तो कोई रोज की तरह अपने दूसरे काम से जा रहा था। किसी परिवार ने बेटा खोया तो किसी ने मां तो किसी ने पिता। जिला मुख्यालय स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस पर अपनों के खून से सने शव देख चीख-पुकार मची रही। 
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पप्पू का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
सुबह 6:30 बजे भाई से हुई बात 
हादसे में जान गंवाने वाले बहराइच जिले के थाना खैरीघाट क्षेत्र के गांव देवदत्तपुर निवासी पप्पू पानीपत में मजदूरी करते थे। छुट्टी मिलने पर वह घर लौट रहे थे। लखीमपुर तक बस से आने के बाद वह मैजिक में बैठकर गांव जा रहे थे। भाई अंकुर ने बताया कि सुबह 6:30 बजे पप्पू ने फोन कर मैजिक में बैठने की जानकारी दी थी। करीब एक घंटे बाद हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। अंकुर ने बताया कि पप्पू तीन भाइयों में मंझले थे। छोटा भाई कुलदीप है। पिता दूलन डेयरी पर काम करते हैं। बेटे की मौत की खबर पर पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचीं मां मुन्नी शव देखकर बेसुध हो गईं।
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गायत्री का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
रोज की तरह स्कूल जा रही थीं गायत्री 
हादसे में जान गंवाने वाली सीतापुर निवासी गायत्री गुप्ता बहराइच के प्राथमिक विद्यालय रायबोझा में शिक्षिका थीं। पति रमेश चंद्र ने बताया कि वह रोज की तरह सोमवार को भी स्कूल जाने के लिए निकली थीं, लेकिन रास्ते में हादसे का शिकार हो गईं। गायत्री के बेटे देवेंद्र गुप्ता और बेटी कृतिका गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। 
 

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हादसे में क्षतिग्रस्त मैजिक गाड़ी - फोटो : संवाद
इंजीनियर की मौत से टूट गए परिवार के सपने
जयवीर ने एमटेक की पढ़ाई की थी और मुंबई की एक निजी कंपनी में इंजीनियर थे। वह छुट्टी लेकर मुंबई से दिल्ली ट्रेन से पहुंचे और वहां से बस से लखीमपुर आए थे। सोमवार सुबह घर पहुंचने की जल्दी में वह मैजिक में सवार हो गए, लेकिन रास्ते में हादसे में उनकी मौत हो गई। जयवीर की अभी शादी नहीं हुई थी। परिवार उनके विवाह को लेकर सपने देख रहा था। वह घर के बड़े बेटे थे। चाचा जितेंद्र ने बताया कि छोटा भाई प्रकाश है। पिता पेशकार सिंह व मां अनीता सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है।
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अस्पताल में राजेश गोयल के रोते-बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बहन के घर से लौटते समय गई जान
मृतक राजेश गोयल तेल और शक्कर की आढ़त का कारोबार करते थे। वह रविवार को लखीमपुर शहर की भटनागर कॉलोनी में अपनी बहन के घर आए थे। सोमवार सुबह बहराइच के मिहींपुरवा स्थित घर लौटते समय हादसे में उनकी मौत हो गई। उनकी बेटी पारुल बीटेक की छात्रा है।
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अस्पताल में रोते-बिलखते परिजन - फोटो : संवाद
जुलेखा के शव को देखकर बिलख पड़े परिजन
धौरहरा के पलटूपुरवा गांव निवासी जुलेखा लखीमपुर में अपनी बेटी के घर मेहमानी में आई थीं। सोमवार सुबह वह गांव लौटने के लिए उसी मैजिक में बैठीं, जो हादसे का शिकार हो गई। हादसे में जुलेखा की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। पोस्टमाॅर्टम हाउस पहुंचे परिजन शव देखकर बिलख पड़े।
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ट्रक से भिड़ा था मैजिक वाहन - फोटो : संवाद
भीषण हादसे में आगे से आधी दब गई मैजिक गाड़ी
ईसानगर क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचने वालों की रूह कांप गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मैजिक आगे से लगभग आधी दब गई थी। नयापुरवा गांव के प्रधान प्रदीप वर्मा ने बताया कि हादसे का मंजर देखकर ही लग रहा था कि शायद ही कोई बचा होगा। पुलिस और ग्रामीणों को शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। 

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डीएम और एसपी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण। - फोटो : संवाद
प्रधान के अनुसार, घटना होने के करीब 10 मिनट बाद वह मौके पर पहुंचे। हाईवे पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई थी। पुलिस भी पहुंच गई और मैजिक सवार लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया था। पुलिस ने किसी तरह मैजिक को खिंचवाकर थाने पहुंचाया। करीब 40 मिनट तक हाईवे पर अफरातफरी और चीख-पुकार का माहौल बना रहा। 
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टक्कर से मैजिक के उड़े परखच्चे - फोटो : संवाद
हाईवे के गड्ढे भी बन रहे हादसों की वजह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में हाईवे और मुख्य मार्गों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर हालात नहीं बदले। पड़ताल के दौरान लखीमपुर से घटनास्थल तक करीब 18 से 20 गड्ढे मिले। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गड्ढों के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और कई लोग जान गंवा चुके हैं।
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