नाव पर सवार होकर पार जाते लोग।
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मल्हीपुर और कटैया गांव के महेश, बच्चन, जयकरन, लल्लन, राकेश, देवपत, अगफान अहमद, नंदे, दिनेश, शिवबाबू, रामबाबू, प्रेम, उमेश, शिवभान के मुताबिक तराई क्षेत्र में बोई गई तिल, अरहर, ज्वार, बाजरा की फसल पूरी तरह से डूब चुकी है। हालात यही रहे तो उनके मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा हो जाएगा। जिस तेजी यमुना बढ़ी है, लोगों को अंदाजा नहीं था कि रात भर में नदी उफान पर आ जाएगी। यमुना के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से ग्रामीणों को वर्ष 2013 और 2019 में आई बाढ़ का मंजर याद आने लगा है।