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Kaushambi News : यमुना की बाढ़ से उफनाई किलनहाई नदी, चार गांवों का संपर्क टूटा, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न

Fri, 01 Aug 2025 04:53 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी

सार

पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बरसात के कारण पिछले 24 घंटों में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।जलस्तर बढ़ने से नेवादा ब्लाक के चकपिनहा गांव के पास से गुजरी किलनहाई नदी उफान पर है।नदी का पानी बढ़ने से चकपिनहा कटैया सड़क मार्ग का संपर्क टूट गया है।
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कौशाम्बी में बाढ़ का दृश्य। - फोटो : संवाद।
पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बरसात के कारण पिछले 24 घंटों में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।जलस्तर बढ़ने से नेवादा ब्लाक के चकपिनहा गांव के पास से गुजरी किलनहाई नदी उफान पर है।नदी का पानी बढ़ने से चकपिनहा कटैया सड़क मार्ग का संपर्क टूट गया है। सड़क पर पांच फिट तक बाढ़ का पानी आने से कटैया,बेनपुर,डिहवा और मल्हीपुर गांव के लोगों के आवागमन के लिए अब सिर्फ नाव ही सहारा है।तराई में बोई गई सैकड़ों एकड़ हरा व सफेद कद्दू, मिर्च ,तिल,बाजरा,अरहर आदि की फसलें डूब गई हैं। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका बनी हुई है।

नेवादा ब्लाक के चकपिनहा गांव के पास से गुजरी किलनहाई नदी तराई में बसे मल्हीपुर गांव में यमुना नदी में जाकर मिलती है।जब यमुना का जलस्तर बढ़ता है तो यमुना का पानी वापस किलनहाई नदी में घुसकर चारों तरफ फैलने लगता है।इस समय यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है , जिसके कारण किलनहाई नदी में भी उफान है। किलनहाई नदी का पानी बढ़ने से चकपिनहा कटैया संपर्क मार्ग पर सड़क पर पांच फिट तक पानी भर गया है।
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कौशाम्बी में बाढ़ का दृश्य। - फोटो : संवाद।
मल्हीपुर, कटैया, डिहवा, बेनपुर गांव का संपर्क चकपिनहा सड़क मार्ग से टूट गया है। अब सड़क पर आवागमन के लिए वाहन की बजाय नाव चलने लगी है।स्कूली छात्र छात्राओं समेत ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यमुना और किलनहाई नदी में बढ़ रहे जलस्तर से बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।तराई में बसे मल्हीपुर, मोहम्मदाबाद उर्फ केवट का पुरवा,मिनहाजपुर,बेनपुर, चकपिनहा,कटैया,डिहवा,पिपरहटा,उमरवल आदि गांवों की सैकड़ों एकड़ फसलें पानी में डूबकर जलमग्न हो चुकी हैं।  
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नाव पर सवार होकर पार जाते लोग। - फोटो : संवाद।
मल्हीपुर और कटैया गांव के महेश, बच्चन, जयकरन, लल्लन, राकेश, देवपत, अगफान अहमद, नंदे, दिनेश, शिवबाबू, रामबाबू, प्रेम, उमेश, शिवभान के मुताबिक तराई क्षेत्र में बोई गई तिल, अरहर, ज्वार, बाजरा की फसल पूरी तरह से डूब चुकी है। हालात यही रहे तो उनके मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा हो जाएगा। जिस तेजी यमुना बढ़ी है, लोगों को अंदाजा नहीं था कि रात भर में नदी  उफान पर आ जाएगी। यमुना के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से ग्रामीणों को वर्ष 2013 और 2019 में आई बाढ़ का मंजर याद आने लगा है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाके का किया दौरा। - फोटो : संवाद।
पुल निर्माण से आधा दर्जन गांव के लोगों को मिलेगी राहत

चकपिनहा गांव स्थित किलनहाई नदी की तलहटी में 20 फिट नीचे ह्यूम पाईप लगाकर रपटा पुल बनाया गया है। जबकि ग्रामीण अरसे से नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहें हैं। हर साल यमुना नदी में बाढ़ आने पर कटैया, मल्हीपुर, डिहवा, गड़ेरियन का पुरवा, बेनपुर के करीब 11 हजार आबादी के लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ती है।

मल्हीपुर के पूर्व प्रधान हीरालाल, देशराज, कटैया निवासी फरीद अहमद, अफगान और शकील अहमद ने बताया की साल 2013 में बैराजों से पानी छोड़े जाने से नदी में आई बाढ़ के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने किलनहाई नदी पर पुल बनाने की मांग की थी। लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि बाढ़ के दौरान संपर्क मार्ग कटने से स्कूली बच्चों को नांव के सहारे स्कूल आना जाना पड़ता है। लोगो की रोजमर्रा की जरुरतो की खरीदारी के लिए बाजार आने जाने में मुसीबत उठानी पड़ती है। पुल निर्माण से इस मुसीबत से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
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कौशाम्बी में बाढ़ के चलते कई इलाकों में चल रही नावें। - फोटो : संवाद।
दो साल पहले बाढ़ में डूबी फसलों का नहीं मिला मुआवजा 

वर्ष 2022 में भी यमुना नदी में उफान आया था। उस समय भी किलनहाई नदी ने तबाही मचाया था। बाढ़ के पानी में तराई क्षेत्र के मल्हीपुर, कटैया, पिपरहटा, डिहवा, मोहम्मदाबाद आदि गांवों के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा दलहनी व तिलहनी फसलें डूबकर नष्ट हो गई थीं। तहसील प्रशासन की ओर से राजस्व टीम ने किसानों की खराब हुई फसलों के नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजा था।

कुछ किसानों को तो खराब फसल की मुआवजा राशि उनके खातों में आ गई, लेकिन कई किसान ऐसे भी हैं जो तहसील का चक्कर लगाते लगाते मायूस हो चुके हैं।मल्हीपुर गांव के रोशनलाल, शिवबरन, रामखेलावन,हरीलाल,दिनई, सुबेदार, रामतीरथ आदि किसानों के मुताबिक लेखपाल को कई बार खतौनी समेत जरूरी कागजात देने के बाद भी आज तक उन्हें बाढ़ में खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिला। मुआवजा राशि मिलने की आस में तहसील प्रशासन का चक्कर काटते हुए वह थक चुके हैं।
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बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करते एसडीएम। - फोटो : संवाद।
एसडीएम ने बाढ़ संभावित क्षेत्र का लिया जायजा 

एसडीएम चायल आकाश सिंह और नायब तहसीलदार कपिल मिश्रा ने राजस्व टीम के साथ शुक्रवार को चकपिनहा और पिपरहटा गांव पहुंचकर बाढ़ के हालात का जायजा लिया। एसडीएम आकाश सिंह ने बताया कि कटैया, मल्हीपुर,बेनपुर और डिहवा गांव के लोगों के आवागमन के लिए दो बड़ी नावों की व्यवस्था कर दी गई है,पिपरहटा गांव का फिलहाल संपर्क मार्ग नहीं टूटा है फिर भी वहां भी एहतियातन एक नाव का इंतजाम कर दिया गया है।राजस्व टीमों को निगरानी के लिए लगाया गया है,पल पल की जानकारी उनसे ली जायेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति अभी सामान्य है, चिंता की कोई बात नहीं है।
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