राहु और केतु अपनी राशियां बदल चुके हैं। राहु कर्क में और केतु मकर में प्रवेश कर चुके हैं। इसे लेकर बहुत चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है। अंतरिक्ष में सभी ग्रह अपनी अपनी चाल से चलते रहते हैं इसलिए समझना यह है कि ग्रहों के अनुसार कैसे जीवन जीना है। राहु और केतु के बदलाव से किन किन बातों के प्रति सतर्क होना है, यह जानना जरूरी है।
विज्ञापन
सर्प का फन माना गया है राहु
2 of 6
राहु और केतु
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिन्तक के अनुसार राहु को सर्प का फन माना गया है अर्थात ग्रसने वाला विषयुक्त। राहु जिस राशि में जाएंगे वहां का स्थान विषाक्त होगा। कर्क राशि में राहु के जाने पर कर्क पर विष का प्रभाव रहेगा। राहु के प्रभाव से व्यक्ति का स्वभाव बहिर्मुखी हो जाता है। ओवर कॉंफिडेंस को नियंत्रित करके रखा जाए तो यह व्यक्तित्व का काफी प्रसार करता है। अपनी बात को सबके सामने रखने में समर्थ हो जाता है। वैसे यह भी देखा गया है कि संघर्ष के साथ साथ करियर में अच्छी उन्नति राहु दिलाता है। विज्ञापन, राजनीति, मार्केटिंग, सेल्स संबंधित क्षेत्रों से जुडे़ लोगों को इस राहु से लाभ भी होता है।
विज्ञापन
राहु में थोड़ा भ्रम भी रहता है
3 of 6
राहु और केतु
कई बार व्यक्ति के सामने कई रास्ते आ जाते हैं जिसका चयन धैर्य और विवेक से करना चाहिए। रमेश चिन्तक ने बताया कि कर्क राशि जल तत्व की राशि है। कर्क राशि वालो को पीने के पानी की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पानी को फिल्टर करके या उबाल कर पिएं। हानिकारक बैक्टीरिया रोगी बना सकते हैं। बाजार का भोजन, फास्ट फूड, बासी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। फूड प्वाइजनिंग, डायरिया, आकस्मिक दुर्घटना कराने में मुख्य भूमिका राहु ही निभाते हैं। हाइजीनिक रहना चाहिए। मानसिक और शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। गुटखा या तंबाकू आदि का सेवन करते हों तो तुरंत बंद कर दें क्योंकि राहु कैंसर का भी कारक होता है। चंदन के उत्पादों का अधिक प्रयोग करना चाहिए। राहु सर्प है और चंदन के ऊपर सर्प के विष का प्रभाव नहीं पड़ता है।
व्यस्त रहें और मस्त रहें
4 of 6
राहु और केतु
चिन्तक इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेस के सचिव शशिशेखर त्रिपाठी ने बताया कि केतु मकर में पधार चुके हैं और अब केतु को कंट्रोल करने के लिए व्यस्त रहना बहुत जरूरी है। मकर राशि वालों को उलझन हो सकती है। भविष्य को लेकर अज्ञात भय चिन्ता का मुख्य कारण बन जाता है। व्यक्ति बीमार हो तो उसकी बीमारी जल्दी डायग्नोज नहीं होती है। अगर बीमारी ठीक नहीं हो रही हो तो उसकी पैथी बदल लेनी चाहिए। उन्होंनेे बताया कि केतु राई को पहाड़ बना देता है इसलिए हर छोटी छोटी बात को बड़ा नहीं करना चाहिए। हर नकारात्मक बात को उत्साह और प्रसन्नता के साथ समाप्त करना चाहिए। एक बात अवश्य ध्यान रखनी चाहिए कि टोने, टोटके या फिर तांत्रिकों के चक्कर में कतई नहीं फंसना चाहिए। 7 मार्च 2019 तक उदासी हावी नहीं होनी चाहिए। डिप्रेशन जैसी समस्या होने पर केतु आत्महत्या जैसे गलत काम करने का विचार ला सकता है, ऐसी स्थिति में हनुमान जी के मंदिर में पताका लगाते हुए मन में उत्साह व सकारात्मक भाव लाना चाहिए। पॉजिटिव सोच रखें तो केतु प्रोजेक्ट, शोध, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग या आध्यात्मिक ध्यान की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
विज्ञापन
राहु को शांत करने के उपाय
5 of 6
राहु और केतु
-घर में प्रतिदिन संध्या करें। शाम को धूप जलाकर धुआं करें। राहु धुआं करने से प्रसन्न होते हैं
-हवन करने से राहु बहुत जल्द शांत होते हैं
-खूब पिएं पानी वरना राहु दे सकता इंफेक्शन
-चंदन सोप और पाउडर का प्रयोग करना चाहिए इससे शांत होता है राहु
गणेश जी की उपासना करें, प्रतिदिन गजानन पर हरी दूब चढ़ाएं
हनुमान जी के मंदिर में लाल रंग की पताका लगानी चाहिए
टोने, टोटके, तांत्रिकों के चक्कर में कतई न फंसे
सकारात्मक भाव के साथ भजन गाना