बिकरू कांड में विकास दुबे के सबसे खास और खूंखार शूटर जिलेदार उर्फ विष्णुपाल सिंह ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। जिलेदार के सरेंडर के बाद यूपी एसटीएफ और पुलिस ने राहत की सांस ली है। पुलिस जल्द ही जिलेदार को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जिलेदार विकास दुबे के इतने करीब आया कैसे...?
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विकास दुबे के पीछे काले कोट में जिलेदार
- फोटो : amar ujala
कुख्यात विकास दुबे के नाम पर राजनीति चमकाने वाले सबसे करीबी ग्राम प्रधानों में विष्णुपाल सिंह उर्फ जिलेदार सिंह यादव प्रमुख था। विकास से इसकी करीबी का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में विकास ने अपने छोटे भाई की पत्नी (बहू) का पर्चा रोककर व ग्रामीणों के विरोध पर भी जिलेदार को चुनाव मैदान में उतारा था, पूरी ताकत से जिताया भी था।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
जिलेदार सिंह भीटी ग्राम पंचायत के सुक्खा निवादा गांव का मूल निवासी है और कानपुर के कल्याणपुर में आवास बनाकर परिवार संग रहता है। विकास दुबे जितने दिन गांव में रहता था, उतने दिन जिलेदार भी उसके संग साये की तरह रहता था। बिकरू की तरह भीटी गांव में विकास दुबे के इशारे पर काम होता था।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
विकास दुबे ने वर्ष 2015 में अपने छोटे भाई अविनाश दुबे की पत्नी अंजना दुबे को भीटी ग्राम पंचायत से प्रधानी लड़ाने का निर्णय लिया था। लेकिन जिलेदार सिंह करीब दस साल तक भीटी का प्रधान रहा, उसने विकास दुबे के पैरों पर सिर रख दिया था। इसके बाद विकास दुबे ने अंजना दुबे का पर्चा नहीं भरा और पूरे दम से जिलेदार को लड़ाकर जिताया भी। वहीं बिकरू गांव निवासी बालगोविंद के पुत्र शिवम का विकास पंडित से गहरा नाता था। राजनैतिक कार्यक्रम हो या फिर शादी-विवाह उन सभी में शिवम विकास दुबे के संग रहता था।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि दो जुलाई की रात को बिकरू गांव में विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यूपी एसटीएफ ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए विकास दुबे सहित उसके पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। अभी तक पुलिस इस मामले में 20 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। विकास के तीन साथी सरेंडर भी कर चुके हैं। वहीं इस घटना में शामिल कई बदमाश अभी तक फरार चल रहे हैं। जिन्हें ढूंढने के लिए यूपी एसटीएफ की कई टीमें लगी हुई हैं।