इस बार पड़ रही भीषण गर्मी ने संकेत दे दिए हैं कि हरियाली के प्रति अब भी सजग नहीं हुए तो आसमान से आग बरसेगी। 24 साल बाद 46 डिग्री के पार पहुंचा अधिकतम तापमान कम होते पेड़ों और बढ़ते शहरीकरण का ही नतीजा है। फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की जनवरी 2019 में आई ताजा रिपोर्ट भी यही बताती है कि कानपुर शहर (जिले) और इसके आसपास के क्षेत्रों में पेड़ों की संख्या में तेजी से कम हो रही है।
वन विभाग की मानें तो शहर के कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत वन क्षेत्र (पेड़, पौधे) होना चाहिए। वर्तमान में वन क्षेत्र महज 2.09 प्रतिशत ही रह गया है। बता दें कानपुर शहर का क्षेत्रफल करीब 500 वर्ग किलोमीटर है।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 5
विश्व पर्यावरण दिवस
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में बताया गया है कि आवासीय क्षेत्रों की संख्या बढ़ने और पेड़ोें का कटान अधिक होने से यह स्थिति बन रही है। वन विभाग के डीएफओ अरविंद यादव के अनुसार जितने पेड़ लगाए जा रहे हैं, उससे कहीं अधिक काटे जा रहे हैं। ऐसे में सरकारी और गैर सरकारी दोनों स्तर से पौधे लगाने का काम करने की जरूरत है।
पौधे लगाए जाने के बाद सुरक्षित रहें, इसका भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि प्रदेश स्तर पर पौधों की स्थिति देखी जाए तो यह 33 प्रतिशत के मुकाबले तीन प्रतिशत रह गई है। पौधे वातावरण में फैली कार्बन डाई आक्साइड गैस के सबसे बड़े अवशोषक माने जाते हैं। इस गैस के बढ़ने से ही वातावरण में प्रदूषण और गर्मी बढ़ती है।
विज्ञापन
3 of 5
विश्व पर्यावरण दिवस
- फोटो : अमर उजाला
इस वर्ष साढ़े 27 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
सरकारी तौर पर इस वर्ष शहर क्षेत्र में साढ़े 27 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश स्तर पर यह लक्ष्य 22 करोड़ का है। डीएफओ के अनुसार पौधे लगाने का लक्ष्य विभागवार दिया गया है। इसमें वन विभाग 10.50 लाख, ग्राम्य विभाग 10 लाख, नगर विकास 1.5 लाख के अलावा पंचायतीराज विभाग, राजस्व विभाग को एक-एक लाख का लक्ष्य मिला है। कुछ और विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। पौधे लगाने का काम जुलाई से शुरू होगा। पिछले वर्ष भी 17 लाख पौधे लगाए गए थे, उसमें से बचे कितने यह वन विभाग को भी पता नहीं है।
4 of 5
विश्व पर्यावरण दिवस
- फोटो : अमर उजाला
प्रयोग में आने वाले पौधे ज्यादा लगाएं
किसानों और आम लोगों के काम आने वाले पौधे इस वर्ष ज्यादा लगाने का लक्ष्य है। इसमें टीक, शीशम, यूकेलिप्टस की संख्या ज्यादा रहेगी।
अपील
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर अमर उजाला आपसे अपील करता है कि अपने आसपास के क्षेत्रों में जितना हो सके पौधरोपण करें और उसके रख रखाव की जिम्मेदारी भी लें। इससे शहर को प्रदूषण मुक्त करने और हरा भरा बनाने में मदद मिलेगी।
प्रदूषित हवा को साफ करते हैं पेड़, बारिश में सहायक
वातावरण में फैली प्रदूषित हवा को साफ करने का काम पेड़ ही करते हैं। पेड़ वातावरण में लगातार बढ़ रही हानिकारक गैसों को सोखते हैं। इन गैसों को सोखकर शुद्ध आक्सीजन छोड़ते हैं। जिन हानिकारक गैसों को पेड़ सोखते हैं, उसमें नाइट्रोजन आक्साइड, अमोनिया, सल्फर डाई ऑक्साइड और ओजोन। इन सभी गैसों की चपेट में आने से आंख, चमड़ा, फे फड़ा, आंत सभी को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा पेड़ बारिश कराने में सहायक होते हैं।