उद्योगपति विक्रम कोठारी की कानपुर के तिलक नगर स्थित कोठी पर बैंक का कब्जा भले ही हो गया हो लेकिन इसकी बिक्री फिलहाल नहीं हो सकती। संपत्तियों की नीलामी पर प्रवर्तन निदेशालय ने रोक लगा रखी है। यह रोक लगे नौ माह से ज्यादा वक्त हो गया है।
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रोक हटने के बाद ही संपत्तियां नीलाम हो सकेंगी। बैंकों के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में रोक हटाने संबंधी याचिका दायर की है, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है।
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दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सीबीआई से कहा है कि इस प्रकरण में गबन किए हुए धन की वापसी कराना सुनिश्चित करें।
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बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की जांच की वजह से संपत्तियों की नीलामी नहीं हो पा रही है। 30 मई 2018 को प्रवर्तन निदेशालय ने नीलामी योग्य संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया था।
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यह है मामला
उद्यमी विक्रम कोठारी पर सात बैंकों का 3695 करोड़ रुपये कर्ज बकाया है। विभिन्न बैंकों में इनके लोन खाते एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) हो गए। गुमटी नंबर-5 स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 फरवरी को विक्रम कोठारी के खिलाफ धोखाधड़ी और बैंकिंग फ्रॉड की शिकायत की।
18 फरवरी को सीबीआई ने विक्रम कोठारी, पत्नी साधना और बेटे राहुल समेत अज्ञात बैंक अफसरों और अन्य लोगों को आरोपी बनाकर एफआईआर दर्ज करते हुए इनके ठिकानों पर छापा मारा था।