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विकास दुबे के शार्प शूटर प्रभात मिश्रा के पिता को पुलिस ने दबोचा, देखते ही बोला मुझे मत मारना

Mon, 17 Aug 2020 08:30 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala

बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के एक और साथी राजेंद्र कुमार मिश्रा को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया है। वो सरेंडर करने की तैयारी में था। पुलिस को देखते ही उसने कहा मुझे मत माराना। कानपुर एनकाउंटर के बाद राजेंद्र पर पुलिस ने पचास हजार का इनाम घोषित किया था। इनामी राजेंद्र कुमार मिश्रा ने कई अहम खुलासे किए हैं। इससे केस को सुलझाने में मदद मिल सकती है। पूछताछ में पहले तो राजेंद्र ने गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी कड़ाई की एक-एक कर सारी बातें कबूलने लगा।

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राजेंद्र मिश्रा - फोटो : amar ujala

राजेंद्र ने बताया कि दो जुलाई को पुलिस टीम पर हुए हमले में वह और उसका बेटा शामिल थे। उसने अपने घर की छत से बेटे के साथ पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। हमले में 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। हमले के बाद वह अपनी पिस्टल विकास दुबे को देकर भाग निकला था। राजेन्द्र ने पुलिस को बताया कि वह कानपुर देहात और आसपास के जिलों में कई जगहों पर छिपता रहा। इस दौरान वह किसी रिश्तेदार के यहां नहीं गया क्योंकि उसे गिरफ्तारी की आशंका थी।

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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala

पुलिस पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किए गए राजेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि उसने अपने घर की घत से पुलिस पर पिस्टल से फायरिंग की थी जबकि बेटे प्रभात ने सेमी आटोमेटिक पिस्टल से पुलिस पर गोलियां चलाई थीं। उसने बताया कि हमले के बाद विकास दुबे ने उसे भागने को कहा और उसकी पिस्टल ले ली थी, ताकि पकड़े जाने पर हथियार की बरामदगी न हो पाए।

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Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला

शनिवार को कानपुर के चौबेपुर से  बिकरूकांड में शामिल इनामी अपराधी राजेंद्र को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ने बताया कि चौबेपुर के बिकरू गांव के राजेन्द्र कुमार मिश्रा को शिवराजपुर रोड पर गंगोत्री रॉयल पशु आहार फैक्टरी के गेट से पकड़ा है। वह कोर्ट में आत्मसमर्पण करना चाहता था, इसी सिलसिले में अपने किसी परिचित से बात करने जा रहा था। राजेन्द्र पर 50 हजार रुपये का इनाम था । 

 

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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
पुलिस के मुताबिक राजेन्द्र का बेटा प्रभात उर्फ कार्तिकेय भी बिकरू कांड का आरोपी था। उसे दो जुलाई को बिकरूकांड के एक सप्ताह बाद ही हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था। कानपुर लाते समय प्रभात ने एक पुलिसकर्मी से पिस्तौल छीनकर एसटीएफ टीम पर फायरिंग कर दी थी, जिसके बाद वह पुलिस के हाथों मारा गया। 
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