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बिकरू कांड: ग्रामीण बोले- आतंकी था विकास दुबे, जिसको चाहा मारा, जहां चाही जमीन कब्जाई

Wed, 05 Aug 2020 11:02 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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बिकरू कांड - फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड और दहशतगर्द विकास दुबे के एनकाउंटर की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई तीन सदस्यीय जांच समिति मंगलवार को कानपुर पहुंची। समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएस चौहान, पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता और न्यायिक आयोग के पूर्व जज शशिकांत समेत पुलिस व प्रशासन के आलाधिकारी बिकरू पहुंचे। समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।
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कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण समिति के सामने बोले, विकास दुबे आतंकी था, उसके रहते जीना दूभर था। बिकरू कांड की जांच के लिए पहले शासन ने एसआईटी और न्यायिक आयोग का गठन किया था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में याचिका दे सिटिंग जज से मामले की जांच कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सिटिंग जज से जांच कराने से इंकार कर यूपी सरकार से जांच समिति गठन करने के निर्देश दिए थे।
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कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएस चौहान, पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता को शामिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति पर मुहर लगा दी थी। मंगलवार को जांच समिति के अधिकारी कानपुर पहुंचे। पहले सर्किट हाउस में डीएम, एडीजी, आईजी और डीआईजी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। दोपहर करीब दो बजे सभी अफसर बिकरू पहुंचे। समिति ने मनु पांडेय से पूरा घटनाक्रम पूछा और घर का निरीक्षण किया। मनु के घर में डीएसपी देवेंद्र मिश्र की हत्या की गई थी।

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विकास दुबे एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
जिसको चाहा मारा, जहां चाही जमीन कब्जाई
ग्रामीणों ने बताया कि विकास की आसपास के बीस से अधिक गांवों में दहशत थी। वह जहां चाहता था, जमीन कब्जा कर लेता था। विकास जिसको चाहता था, मार देता था। राधेश्याम ने कहा कि सन् 2000 में उनके भाई राम बाबू की हत्या हुई। 2017 में वेद प्रकाश के भाई जय प्रकाश की हत्या हुई। विकास ने सन् 2001 में भाजपा नेता एवं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला को थाने में मार दिया था। किसी भी मामले में उसको सजा नहीं हुई। क्योंकि किसी की हिम्मत नहीं हुई उसके खिलाफ गवाही देने की। इसी तरह गांव के गफूर खां समेत पांच छह ग्रामीणों ने बताया कि कई बीघा जमीन विकास ने कब्जा कर रखी थीं।
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विकास दुबे का एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
क्राइम सीन दोहरा कर समझायी वारदात
गांव में जिस तरह दो जुलाई की रात विकास ने रास्ते में जेसीबी लगाई थी, ठीक वैसे ही मंगलवार को भी जेसीबी लगाई गई। इसके बाद अधिकारियों ने जांच समिति को बताया कि यहीं पर जब पुलिसकर्मी रुके तो तीन तरफ से गोलियां चलने लगीं। जब वे बाईं तरफ भागे तो दहशतगर्दों ने उनको घेरकर मार दिया। जांच समिति के अधिकारी उन छतों पर भी गए, जहां से पुलिसकर्मियों पर गोलियां दागी गईं थीं। समिति ने पुलिस अफसरों से वारदात से जुड़ी एक-एक जानकारी लेने के साथ सभी दस्तावेज भी लिए हैं।
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