विकास दुबे अपनी दहशत कायम रखने को हैवानियत की किसी भी हद को पार करने को तैयार रहता था। खेतों पर कब्जे को लेकर एक ग्रामीण ने जब उसके खिलाफ आवाज उठाई तो उसने उसको बीच गांव में पीटा और मुंह में पेशाब कर दी थी। ऐसी क्रूरता और दरिंदगी की वजह से लोग उससे खौफ खाते थे। इसका खुलासा करने के साथ ही उमाकांत ने बताया कि विकास इंसान नहीं राक्षस था। उसके लिए इंसान की जान की कीमत नहीं थी। मजबूरी में लोग उसका साथ देते थे।
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चौबेपुर थाने में पत्नी के साथ दंडवत उमाकांत
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लाइसेंसी राइफल से दागीं थीं गोलियां
उमाकांत ने बताया कि विकास के कहने पर उसने अपनी लाइसेंसी राइफल से पुलिस कर्मियों पर गालियां दागीं थीं। घटना के बाद विकास ने कहा था कि सब लोग अलग-अलग हो जाओ। इसलिए वह शहर दर शहर घूमता रहा। जब कोई रास्ता बचने का नहीं दिखा तो थाने में सरेंडर करने की योजना बनाई।
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विकास दुबे एनकाउंटर
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पुलिस नाकाम, कोर्ट-थाने में बदमाश कर रहे सरेंडर
बिकरू कांड के आरोपियों की धरपकड़ में पुलिस काफी हद तक नाकाम रही है। वारदात के बाद दो बदमाशों को मारने और दो महिलाओं समेत पांच लोगों को जेल भेजने के अलावा पुलिस किसी और को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। हालांकि एसटीएफ ने तीन बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर करने के साथ अधिकतर गिरफ्तारियां की हैं। उमाकांत ने अपने एक करीबी के जरिये थाने में सरेंडर होने की योजना बनाई और हाजिर हो गया। पुलिस उसको गिरफ्तार करने में नाकाम रही।
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विकास दुबे का एनकाउंटर
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वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने प्रेम प्रकाश और अतुल दुबे को मार गिराया था। इसके बाद जहान सिंह, श्यामू बाजपेई समेत पांच लोगों गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अन्य सभी गिरफ्तारियां एसटीएफ की टीम ने कीं। विकास दुबे समेत तीन को एसटीएफ ने ही मार गिराया था। एक को इटावा पुलिस ने ढेर किया।
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कानपुर एनकाउंटर
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पुलिस शुरुआती कार्रवाई करने के बाद हर तरह से फेल रही है। पिछले सप्ताह आरोपी गोपाल सैनी भी पुलिस को चकमा दे कोर्ट में सरेंडर कर जेल चला गया था। अब उमाकांत ने थाने में सरेंडर कर दिया। इसका वीडियो भी बनाया गया। अभी भी जिलेदार, शिव तिवारी, हीरू दुबे से जैसे खूंखार बदमाश फरार हैं।
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कानपुर एनकाउंटर
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घर पर ही दबिश देती रही पुलिस
सूत्रों के मुताबिक तीन-चार दिन से उमाकांत बिकरू गांव व चौबेपुर के आसपास ही शरण लिए हुए था। पुलिस केवल उसके घर पर ही दबिश देती रही। इस दौरान उसके एक करीबी शायद ये वकील या कथित पत्रकार है। उसने थाने में सरेंडर करने की सलाह दी। पुलिस उमाकांत को शरण देने वालों को चिह्नित कर रही है।
घर तक नहीं पहुंची पुलिस
हाल में ही एसटीएफ ने मदारीपुरवा गांव के प्रधान राम सिंह यादव को जेल भेजा था। पूछताछ में उसने बताया था कि वारदात के बाद वह इधर-उधर से गांव की खबर लेता रहता था। इस दौरान उसने बताया कि पुलिस उसके घर ही नहीं गई। इससे पुलिस की लापरवाही अंदाजा लगाया जा सकता है।