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Kanpur Encounter: विकास दुबे के बॉडीगार्ड को दबोचने के लिए पुलिस और एसटीएफ ने बिछाया जाल, घंटों की कॉम्बिंग

Mon, 06 Jul 2020 10:39 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
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भाऊपुर गांव में पुलिस छापा मारी के बाद पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
आठ पुलिसवालों की जान लेने वाले विकास दुुबे के अंगरक्षक की तलाश में स्थानीय पुलिस के साथ कानपुर पुलिस और एसटीएफ ने जिले में आठ घंटे कॉम्बिंग की। हालांकि उसे पकड़ने में कामयाबी नहीं मिल सकी। पुलिस सूत्रों के मुुताबिक विकास दुबे का पड़ोसी बब्बन दुबे ही उसका अंगरक्षक है।
 
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
खुद की लाइसेंसी दुनाली बंदूक के साथ अन्य असलहों से लैस रहता है। वह विकास का काफी भरोसेमंद माना जाता है। कल्यानपुर थाने के भाऊप़ुर गांव की एक लड़की की शादी बब्बन के भाई के साथ हुई है। पुलिस को सुराग मिला था कि बिकरू कांड के बाद बब्बन छिपने के इरादे से भाई के साले की मदद से बाइक से भाऊपुर पहुंचा है।

कानपुर से लोकेशन की सूचना पर स्थानीय पुलिस चौकन्नी हुई और घेराबंदी की तैयारी शुरू की गई। रविवार रात में कानपुर पुलिस और एसटीएफ टीम पहुंची। भाऊपुर गांव और आसपास तलाश की। बब्बन तक पहुंचने के लिए पुलिस ने उसके भाई के साले को हिरासत में लेकर दूसरे साले को फोन करवाते हुए बब्बन की लोकेशन पूछी।


 
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विकास दुबे (काले कोट में) - फोटो : amar ujala
पता चला कि बब्बन डेढ़ घंटे रुकने के बाद बाइक से ही कहीं और चला गया। इसके बाद पुलिस ने इलाके में कांबिंग की। बब्बन के रिश्तेदारों व एक पूर्व प्रधान से पूछताछ भी की। इस दौरान कुछ देर पूरा गांव छावनी में तब्दील नजर आया। पता चला है कि पुलिस संबंधित परिवार के कुछ सदस्यों के साथ बब्बन की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है।

 

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पूर्व सांसद राजा राम पाल के साथ विकास दुबे - फोटो : amar ujala
ग्रामीण बोले, गांव में रात के विकास दुबे आवै रहा
भाऊपुर गांव में रात को बड़ी संख्या में पुलिस देख नजदीकी साईं, चौडगरा, शिवराजपुर, भाऊपुर, रावतपुर गांव के लोग भी दहशत में आ गए। गंगा कटरी के लोग चौडगरा से रात को गांव की ओर लौट रहे थे। इस दौरान पुलिस ने हर ग्रामीण का मोबाइल फोन छीना, चेक किया और फिर स्विचऑफ कर वापस दे दिया। सोमवार सुबह ग्रामीणों के बीच इस मामले की चर्चा रही। पुलिस की सक्रियता से कई लोग कहते रहे, रात के पुलिस को मारे वाला विकास दुबे गांव आवै रहा, लागत तबहीं इतनी फोर्स पकड़े आई रहै। 

 
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विकास दुबे - फोटो : amar ujala
चेकिंग पर उठे सवाल
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि अगर विकास दुबे का अंगरक्षक बब्बन भाऊपुर आया और पुलिस के पहुंचने से पहले निकल भागा तो जगह-जगह पुलिस चेकिंग का क्या औचित्य है। यह भी कहा जा रहा है कि बिकरू कांड की तरह कहीं पुलिस आने की सूचना पहले तो लीक नहीं हो गई।
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