बिकरू कांड में विकास दुबे और उसके गुर्गों ने पुलिस वालों पर तब तक गोलियां चलाईं, जब तक उनकी सांसें न थम गईं। यही वजह है कि जब पुलिस बल वहां पहुंचा तो आठों की मौत हो चुकी थी।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
लिहाजा किसी का बयान नहीं हो सका था। घायलों के ही बयान हो सके थे। इस तथ्य का जिक्र चार्जशीट में पुलिस ने किया है। इस कांड में डीएसपी देवेंद्र मिश्र, एसओ महेश यादव समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
आधे घंटे हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग
पुलिस की जांच के मुताबिक जब पुलिस ने दबिश दी तो छतों से करीब 15 मिनट तक बदमाशों ने फायरिंग की। इसके बाद नीचे उतरने के बाद भी 15 मिनट तक गोलियां चलाईं। चार्जशीट में इस तथ्य का भी उल्लेख है।
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
ये है बिकरू कांड
दो जुलाई की आधी रात सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा ने विकास दुबे को दबोचने के लिए शिवराजपुर, बिठूर और चौबेपुर थानों की पुलिस के साथ बिकरू गांव में दबिश दी थी।
कुख्यात विकास दुबे गैंग ने सीओ बिल्हौर सहित एसओ शिवराजपुर महेश यादव, एसआई अनूप कुमार, नेबू लाल सहित आरक्षी जितेंद्र, सुल्तान, बबलू और राहुल की हत्या कर दी थी। विकास सहित पूरा गैंग पांडु नदी के गुप्त रास्ते से शिवली की ओर भाग गया था।