बिकरू कांड की एसआईटी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। विकास दुबे, उसके पिता, भाई, बहू, जय बाजपेई समेत 15 करीबियों ने फर्जी दस्तावेज के सहारे शस्त्र लाइसेंस हासिल कर लिए थे। इसके चलते जिलाधिकारी ने तत्कालीन तीन शस्त्र लिपिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
2 of 5
विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
वहीं पूरे मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई है। दरअसल विकास दुबे, उसके भाई दीपक दुबे समेत उसके साथियों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बावजूद उनके पास शस्त्र लाइसेंस थे। बिकरू कांड के बाद एसआईटी ने इसकी जांच की तो 15 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें फर्जी दस्तावेज लगाए थे।
विज्ञापन
3 of 5
कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
किसी ने आपराधिक इतिहास छिपाया तो किसी ने पहचान पत्र समेत अन्य दस्तावेज फर्जी लगाए। पुलिस, प्रशासन उस समय तो मामला पकड़ नहीं पाए। अब जब एसआईटी ने प्रशासन को इस संबंध में पत्र भेजकर साक्ष्य दिए तो हड़कंप मच गया। फिलहाल डीआईजी को डीएम ने तीन शस्त्र लिपिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की संस्तुति की है। बाकी पर रिपोर्ट सीबीसीआईडी की जांच पूरी होने के बाद दर्ज की जाएगी।
4 of 5
विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
इन्होंने किया फर्जीवाड़ा
विकास दुबे, रामकुमार दुबे, अंजलि दुबे, दीपक, जय बाजपेई, विष्णुपाल उर्फ जिलेदार, अमित उर्फ छोटे बउवा, दिनेश कुमार, रवींद्र, अखिलेश, आशुतोष, अरविंद त्रिवेदी, कंचन त्रिवेदी (अरविंद की पत्नी) आदि।
इन लिपिकों पर होगी रिपोर्ट
एसआईटी की जांच में 2005 में कलक्ट्रेट में तैनात रहे सभी शस्त्र लिपिक जांच के घेरे में हैं। इनमें से तत्कालीन प्रमुख दोनों शस्त्र लिपिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक तत्कालीन सहायक शस्त्र लिपिक शैलेश त्रिवेदी वर्तमान में डीएम कोर्ट में पेशकार हैं।