बिकरू कांड के मुख्य आरोपी रहे विकास दुबे पर नरमी कानपुर ही नहीं लखनऊ पुलिस ने भी बरती। लखनऊ की कृष्णा नगर पुलिस की लापरवाही से विकास के भाई दीपक दुबे को सेमी आटोमेटिक राइफल कोर्ट से रिलीज हो गई थी। पुलिस ने न तो अपना पक्ष रखा और न ही केस से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराए।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
इसी का फायदा उठाकर विकास को मामले में जमानत भी मिल गई थी। एसआईटी ने इस मामले को जांच में शामिल किया है। कृष्णा नगर के तत्कालीन थानेदार, जांच अधिकारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को दोषी मानकर कार्रवाई की सिफारिश की है। लखनऊ एसटीएफ ने 2017 में विकास को कृष्णा नगर इलाके से गिरफ्तार किया था।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
उसके पास से भाई की सेमी आटोमेटिक राइफल बरामद हुई थी। करीब एक साल बाद 2018 में दीपक ने कोर्ट से राइफल रिलीज करा ली थी। पुलिस की लापरवाही के चलते इसी मामले में विकास को 2019 में जमानत भी मिल गई थी। बिकरू कांड की जांच कर रही एसआईटी ने लखनऊ पुलिस से इस मामले की भी जानकारी ली। कृष्णानगर के तत्कालीन थानेदार अंजनी कुमार पांडेय (वर्तमान में हजरतगंज इंस्पेक्टर) समेत अन्य पुलिस वालों के बयान लिए हैं।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
अवैध तरीके से खरीदी गई थी राइफल
सेमी ऑटोमैटिक राइफल राज्यपाल की अनुमति से ही ली जा सकती है। दीपक दुबे ने सामान्य राइफल के लाइसेंस पर यह राइफल खरीद ली थी। बिकरू कांड में विकास ने इस राइफल का इस्तेमाल भी किया था। राइफल नेशनल गन हाउस से खरीदी गई थी। ऐसे में गन हाउस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थे। वहीं दीपक दुबे आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी लाइसेंसी शस्त्र रखता था। पुलिस ने इसकी भी अनदेखी की। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इनका भी जिक्र किया है।
पुलिस की शह से टॉप-10 में शामिल नहीं था विकास
बिकरू कांड के बाद अमर उजाला ने खुलासा किया था विकास दुबे पर पांच दर्जन से अधिक केस दर्ज थे, इसके बावजूद पुलिस ने न तो जिला स्तर पर और न ही थाने स्तर पर उसको टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल किया था। एसआईटी ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया है।