महोबा जिले में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों कपिल, धर्मेंद्र और घायलों छात्रों की गहरी दोस्ती थी। यह सभी छात्र एक ही गांव के रहने वाले थे। साथ स्कूल और कोचिंग आते-जाते थे। गांव में ही अधिकांश एक साथ खेलते और घूमते थे। कपिल और धर्मेंद्र की मौत से उनके परिजनों के साथ ही घायलों के परिजन व गांव वाले दुखी हैं।
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मौके पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मौके पर पहुंचे मृतक छात्रों के माता-पिता रोते-रोते अचेत हो गए। रिश्तेदारों व ग्रामीणों ने उन लोगों को संभाला। कपिल के पिता अशोक पांचाल दिल्ली में फर्नीचर बनाने का काम करते थे। अशोक के साथ तीन बार हादसा हुआ। इससे उनकी जमा पूंजी इलाज में खर्च हो गई।
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मृतकों के गांव पहुंचे एसडीएम
- फोटो : अमर उजाला
पांच बीघा खेती भी बिक गई। तीन दिन पहले भी अशोक बाइक से गिरकर जख्मी हो गए। अशोक और उनकी पत्नी रामदेवी ने रोते हुए बताया कि माली हालत ठीक न होने के बाद भी उन लोगों ने कपिल की पढ़ाई में किसी तरह की कटौती नहीं की। सपना था कि कपिल पढ़ लिखकर अफसर बनेगा, लेकिन अब उनका सपना टूट गया।
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मौके पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
धर्मेंद्र के पिता संतोष साहू तो साइकिल पर सब्जी बेचकर परिवार का पेट पालते हैं। संतोष ने बिलखते हुए बताया कि धर्मेंद्र उनका इकलौता बेटा था। वही परिवार का सहारा था। वह तो उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन हादसे में हुई धर्मेंद्र की मौत से उनका सब कुछ बिखर गया।
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मौके पर लगी भीड़
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हादसे में जान गंवाने वाले छात्र थे मेधावी
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले छात्र कपिल और धर्मेंद्र दोनों मेधावी थे। दोनों ने हाईस्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। परिजनों के मुताबिक कपिल के हाईस्कूल में 87 प्रतिशत और धर्मेंद्र के 68 फीसदी अंक आए थे।
सुबह आठ से शाम छह बजे तक चलेंगी कोचिंग
जिस कोचिंग में कपिल, धर्मेंद्र और उनके साथी पढ़ने जाते थे। वह कोचिंग सुबह पांच बजे खुल जाती थी। इसी समय पर वे कोचिंग पढ़ने जा रहे थे और हादसे का शिकार हो गए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम कुलपहाड़ मोहम्मद उवैस ने तहसील क्षेत्र के सभी कोचिंग संचालकों को पत्र जारी कर कोचिंग खुलने का समय सुबह आठ से शाम छह बजे तक करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि सुबह चार-पांच बजे कई कोचिंग वाले छात्रों को बुलाते हैं।