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उन्नाव कांडः कभी पीड़ित परिवार और सेंगर के रिश्ते थे बेहद मधुर, फिर आया साल 1990 और कुछ अहम बातें

Tue, 30 Jul 2019 12:10 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव जिले के माखी थानाक्षेत्र की रहने वाली युवती ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर जून 2017 में बंधक बनाकर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने थाने में आरोपी विधायक के खिलाफ तहरीर दी थी लेकिन कार्रवाई करने की बात तो दूर पुलिस उसे टरकाती रही। इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।


आगे की स्लाइड में ः कुलदीप की सुरक्षा से लेकर उनके हर काम में उनका साथ देते थे
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार को इसी ट्रक ने मारी टक्कर - फोटो : अमर उजाला
इस मामले को लेकर पीड़िता का परिवार कई बार लखनऊ में पुलिस के उच्चाधिकारियों से भी मिला। एक बार मुख्यमंत्री से जनता दरबार में गुहार लगाई, लेकिन जांच की बात कहकर मामले को टाल दिया गया था।

 
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भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
रविवार को हुए कार हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की जान चली गई। जबकि पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। वहीं इस मामले में एक बड़ी बात सामने आई है कि जिस ट्रक की टक्कर से यह दर्दनाक हादसा हुआ उसके मालिक के बारे में पुलिस के हाथ अहम जानकारी लगी है। साथ ही कई ऐसी बातों का भी खुलासा हुआ है जिनसे अभी तक लोग अपरिचित हैं।


 

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कुलदीप सिंह सेंगर
दरअसल, पुलिस को जांच में पता चला है कि रायबरेली-लालगंज हाईवे पर उन्नाव के चर्चित दुष्कर्म मामले की पीड़िता की कार को टक्कर मारने वाला ट्रक फतेहपुर के सपा नेता व पूर्व जिला सचिव नंदू पाल का है और कुलदीप सिंह सेंगर का भी फतेहपुर से नाता रहा है। यहां उनका पैतृक गांव है। वहीं सपा नेता का कहना है कि इसे साजिश बताकर बेवजह तूल दिया जा रहा है, जबकि यह महज हादसा है। सपा नेता का कहना है कि ट्रक के नंबर प्लेट में कालिख पोतने की वजह केवल फाइनेंसर की नजरों से बचना था। 
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कुलदीप सिंह सेंगर
आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर उनके हर काम में उनका साथ देने वाले व्यक्ति की भतीजी के साथ गलत हरकत न होती तो शायद 2005 में शुरू हुई आपसी रंजिश दुश्मनी में न बदलती। यह बात पहली बार मामला सुर्खियों में आने पर मृतक कैदी के भाई ने कही थी। बंदी की मौत के बाद अब तीन भाईयों में उसका सबसे छोटा भाई महेश ही बचा है।
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कुलदीप सिंह सेंगर
तब महेश ने बताया था कि उसका दिल्ली में लोहे का कारोबार है। महेश ने बताया कि उनके सबसे बड़े भाई विधायक कुलदीप की सुरक्षा से लेकर उनके हर काम में उनका साथ देते थे। इसके कारण वह (महेश) और सुरेंद्र भी कुलदीप व उनके परिवार की तरह थे।
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कुलदीप सिंह सेंगर
बताया कि आपसी मनमुटाव तब शुरू हुआ जब 1990 के पंचायत चुनाव में गुड्डू ने बीडीसी का चुनाव लड़ा। कुलदीप ने यह कहकर चुनाव लड़ने से रोका कि गांव में एक ही नेता रहेगा। विरोध के बाद भी बड़े भाई गुड्डू चुनाव जीते। इसके बाद भी वह (महेश) उनके साथ रहा।

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दुष्कर्म के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर - फोटो : अमर उजाला
उनके मुताबिक पहली बार बसपा से विधायकी का टिकट उसने ही दिलाया था क्योंकि तत्कालीन बसपा नेता आरके चौधरी से उसकी काफी जान पहचान थी। बताया कि अगर देखा जाए तो कुलदीप को विधायक बनाने वाला वही है।

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कुलदीप सिंह सेंगर
बताया कि 2010 में उसके बड़े भाई गुड्डू सिंह की शहर के मोहल्ला कलक्टरगंज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगर वह (विधायक) गलत हरकत न करते तो आज भी वह उनका कभी विरोध न करता।
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कुलदीप सिंह सेंगर
हिस्ट्रीशीटर अपराधी होने के सवाल पर बताया कि माखी थाने में वही होता है जो नेता जी चाहते हैं। इसी की नतीजा है कि वह जिले में रहा भी नहीं और मारपीट, लूटपाट के मुकदमे उसके ऊपर दर्ज होते गए।
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