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उन्नाव कांड: भाई को ‘शह’ देने में ‘मात’ खा गए कुलदीप, गांव में चलता था छोटे भाई का रसूख

Thu, 19 Dec 2019 01:07 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव में लगातार चुनाव में जीत और जिले की तीन विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व करने से कुलदीप सेंगर की शासन-प्रशासन मेें अच्छी पकड़ थी। विधायक के रुतबे का सबसे ज्यादा गलत फायदा उनका छोटा भाई अतुल सेंगर उठाता था। विधायक के दबाव में पुलिस उसका साथ देती थी। इससे उसका हौसला बढ़ता चला गया।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
पीड़ित किशोरी के पिता (अब मृतक) को अतुल ने गांव में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। तब भी भाई मोह में विधायक ने अधिकारियों से पैरवी की थी। पीड़िता की मां की तहरीर के बाद भी पुुलिस ने अतुल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और दुष्कर्म के मामले में विधायक और पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में उनका छोटा भाई सलाखों के पीछे पहुंच गए।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
आए दिन लोगों से मारपीट करना और फिर उन्हीं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देना, विधायक के छोटे भाई अतुल सिंह के लिए आम बात थी। वर्ष 2017 से कानूनी पेंचों में उलझा नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सीबीआई तक पहुंचने में भी विधायक के छोटे भाई की भूमिका रही थी। 3 अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता का पिता दिल्ली से पेशी पर आया था। तारीख पेशी के बाद वह अपनी मां को दवा देने गांव गया था। तभी विधायक के भाई व अन्य लोगों ने उस पर दबाव बनाने के लिए बेरहमी से मारपीट की थी।

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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
मारपीट के बाद अतुल के एक गुर्गे की तहरीर पर पुलिस ने पीड़िता के पिता के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी। उसके पास से तमंचा की बरामदगी दिखाकर पुलिस ने आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कर दी थी। पिटाई से घायल पीड़िता के पिता को पुलिस ने इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। इसी रात पीड़िता की मां ने एसपी की अनसुनी के बाद डीएम को आपबीती बताई। डीएम ने एसओ माखी को रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया था।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
यहां भी पुलिस ने एक बार फिर खेल कर दिया था। 4 अप्रैल 2018 को पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही विनीत, सोनू, बउवा और शैलू के खिलाफ पीड़िता के पिता से मारपीट की रिपोर्ट दर्ज की थी। तहरीर में नाम होने के बाद भी विधायक के भाई अतुल सेंगर का नाम हटा दिया था। 5 अप्रैल 2018 को पुलिस ने पीड़िता के पिता को जिला अस्पताल से जेल भेज दिया था, जबकि घरवाले इलाज कराने की मांग करते रहे थे।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
8 अप्रैल 2018 की रात पिता की जेल में हालत बिगड़ी तो जेल प्रशासन ने जिला अस्पताल भेजा था। सुबह 3:49 बजे उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद मामला एसआईटी तक पहुंचा, तब अतुल सहित पांच लोगों पर किशोरी के पिता की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद प्रकरण सीबीआई तक पहुंचा और विधायक पर भी नाबालिग से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कर सीबीआई ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
छोटे भाई ने पहले भी किए कारनामे
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या में जेल में बंद विधायक के छोटे भाई अतुल सिंह ने 18 जुलाई 2004 में तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक रामलाल वर्मा को गोली मारी थी।  घटना में विधायक के भाई समेत 20 पर जानलेवा हमला, 7 क्रिमिनल एक्ट में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। हालांकि चार्जशीट के बाद मुकदमे की फाइल ही गायब हो गई। इसके बाद वर्ष 2014 में भी अतुल ने कानपुर में एक अधेड़ को गोली मार दी थी। विधायक की ऊंची पहुंच के चलते यह मामला भी रफादफा हो गया था।
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