यूपी के कानपुर में अपसरों की अनदेखी के चलते दो गांवाें के हालात कभी भी सोनभद्र जैसी घटना को दोहरा सकते हैं। सोनभद्र जिले में आदिवासियों की जमीन को लेकर हुए खूनी संघर्ष जैसे हालात कई बार बिल्हौर के ककवन ब्लाक के मनावा और औरोताहरपुर ग्राम पंचायत की सीमा पर बसे जोगिनडेरा गांव में बन चुके हैं।
विज्ञापन
2 of 5
जोगिनडेरा गांव में आए दिन होता है संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी अफसर इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसी भी दिन दोनों गांव में संघर्ष की आशंका बनी रहती है। सोनभद्र में जमीन पर कब्जे को लेकर हुए संघर्ष में दस लोगों की मौत हो चुकी है। मनावा के पूर्व प्रधान संतोष, राज किशोर, बृज किशोर ने बताया कि जोगिनडेरा गांव में दो सौ से अधिक सपेरा जाति के घुमंतू परिवारों का स्थाई ठिकाना है।
विज्ञापन
3 of 5
यूपी के कनपुर में जोगिनडेरा गांव
- फोटो : अमर उजाला
करीब 50 वर्ष से जोगियों के परिवार यहां रह रहे हैं। 1980 में तत्कालीन प्रधान मेवालाल यादव ने जोगिन डेरा के सपेरों को जीविकोपार्जन के लिए करीब पांच सौ बीघा कृषि योग्य भूमि लखनऊ-इटावा राजमार्ग और विषधन मार्ग के आसपास पट्टे पर दी थी। अब सड़कों का चौड़ीकरण और जमीन की कीमत बढ़ती देख अनपढ़ और गरीब सपेरों से नियम विरुद्घ ढंग से भू माफियाओं ने खरीद ली है।
4 of 5
जोगिनडेरा गांव की अनदेखी कर रहे है अफसर
- फोटो : अमर उजाला
खरीदी गई जमीन पर कब्जे को लेकर इसी वर्ष जनवरी में काफी विवाद भी हो चुका है। भू माफिया कब्जा खरीदी गई जमीन पर जब कब्जा करने आते हैं तो सपेरों से उनका विवाद होता है। पुलिस और राजस्व विभाग के अफसर की झोपड़ियों में रहने वाले जोगियों को इधर-उधर कर मामला शांत कर देते हैं।
जोगिनडेरा गांव की सड़क पर पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
जोगिन डेरा गांव निवासी सपेरा गुलाब नाथ, धरमनाथ, गोपीनाथ, शिवानाथ, पूरननाथा, सोनिया ने बताया कि उनके पूर्वजों को यह जमीन पट्टे पर मिली थी। बिल्हौर तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि जोगिनडेरा गांव में सपेरों की पट्टे की भूमि को खरीदने और उस पर कब्जे को लेकर विवाद की जानकारी नहीं है। क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक से पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।