कोरोना की दूसरी लहर में डॉ. सुशील कुमार कोविड की चपेट में आ गया था। वह कोविड से उबर तो गया लेकिन पोस्ट कोविड स्थिति में अवसाद ने उसे जकड़ लिया। रामा मेडिकल विश्वविद्यालय में उसके साथ काम करने वालों का कहना है कि कोविड के बाद डॉ. सुशील ने मिलना-जुलना और बोलना कम कर दिया था।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डॉ. सुशील कुमार के सीनियर और कोरोना की दूसरी लहर में उसके साथ कोविड का काम देखने वाले फार्माकोलॉजी के एक प्रोफेसर का कहना है कि डॉ. सुशील सामान्य मिजाज का व्यक्ति था। कॉलेज के प्राचार्य के रूप में डॉ. सुशील कुमार का व्यवहार अच्छा रहा है। डॉ. सुशील कुमार के एक और सहकर्मी ने बताया कि कोरोना से ठीक तो हो गए थे लेकिन उसके दिल में कोरोना का डर समा गया था।