कानपुर में टीकाकरण की धीमी रफ्तार के बीच कोरोना की तीसरी लहर भी सिर पर है। इस खतरे से बेफिक्र लोग बाजारों में ऐसे उमड़ रहे हैं, जैसे कोरोना कभी था ही नहीं। दो माह पहले सैकड़ों लोगों को मौत की नींद सुला देने वाली दूसरी लहर भी भूल बैठे हैं। ऊपर से टीकाकरण अभियान का भी बुरा हाल है। जिले में 34 लाख लोगों को टीका लगना है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी एक तिहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महामारी विशेषज्ञ के गणितीय आकलन के मुताबिक, कोरोना की तीसरी लहर महज दो से तीन सप्ताह दूर है। इन हालात में कोरोना से बचाव के लिए सबसे सुरक्षित माने जा रहे टीकाकरण का कवरेज आधा भी नहीं हो पाएगा। जुलाई के लिए जिले को 1.19 लाख वैक्सीन का कोटा उपलब्ध कराया गया है।
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तीसरी लहर के बीच लापरवाही
- फोटो : amar ujala
इसे 31 जुलाई तक खत्म करना है। इससे शासन की ओर से तय रोजाना 20 हजार टीकाकरण का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाएगा। जिले में कुल 34 लाख लोगों में से महज नौ लाख को ही अभी तक वैक्सीन की पहली डोज लग सकी है। इसके अलावा दो लाख लोग ऐसे हैं, जिनको दोनों डोज लग चुकी है।
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रोज होते थे सैकड़ों की संख्या में अंतिम संस्कार, नहीं लिया कोई सबक
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विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद बनेगी, लेकिन दूसरी खुराक का कवरेज अभी बहुत कम है। टीकाकरण अभियान जिले में शुरू से ही लड़खड़ाया रहा। ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण में तेजी लाने के लिए चलाया जा रहा क्लस्टर वार अभियान पर्याप्त वैक्सीन मिली तो चला, अन्यथा यह भी ठप।
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अस्पतालों में नहीं बची थी जगह
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जितनी मिल रही, उतनी लगा रहे
सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह का कहना है कि 1.19 लाख खुराक मिलनी हैं। एक समान डोज नहीं मिल रही। कभी अधिक मिल जाती है तो कभी कम। जितनी खुराक मिल रही हैं, उसी हिसाब से टीकाकरण होता है। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा का कहना है कि वैक्सीन की खुराक की उपलब्धता के हिसाब से ही जिले अपना प्लान तैयार कर रहे हैं।
ऐसी बेफिक्री... भारी ही पड़ेगी
बाजार हों या धार्मिक स्थल, शहर के हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क भूल बैठे हैं। सोमवार को दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद बाजार खुलने पर भीड़ उमड़ पड़ी। सोमवार होने से परमट मंदिर में श्रद्धालुओं ने कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाईं। वहीं, बकरीद से दो दिन पहले बाबूपुरवा में सजे बकरा बाजार का भी यही हाल रहा।