महानाट्य जाणता राजाः मनोरंजन या दान, 1 करोड़ से ज्यादा की कमाई का खेल, टिकट खरीदने का दबाव क्यों?
Wed, 24 Oct 2018 05:48 PM IST
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
सार
- आयोजन समिति ने एडवांस टैक्स दिए बिना ही शुरू कराया पांच दिवसीय महानाट्य
- अमर उजाला की पड़ताल के बाद शुरू हुई जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने की कवायद
-रोजाना औसत 30 लाख रुपये की हो रही टिकटों की बिक्री, 18 फीसदी है टैक्स
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित महानाट्य ‘जाणता राजा’ की भव्यता की कहानी तो आपने खूब सुन ली। अब सुनिए कानपुर में हो रहे इस महानाट्य के आयोजन का दूसरा पहलू कि किस तरह से आयोजन समिति के सदस्यों ने शिवाजी के आदर्शों पर न चलकर टैक्स मारने का खेल किया। रोजाना औसत 30 लाख रुपये टिकट बिक्री होने के बावजूद आयोजन समिति ने एडवांस जीएसटी दिए बिना ही कार्यक्रम शुरू करा दिया। कार्यक्रम शुरू कराने से पहले जीएसटी में रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया। टिकटों पर जीएसटी नंबर तक दर्ज नहीं है।
सिनेमा और ड्रामा की तरह रंगमंच भी मनोरंजन कर के दायरे में आता है। जीएसटी लागू होने के बाद ये सर्विस टैक्स में समाहित है। जीएसटी के प्रावधानों के मुताबिक इनके आयोजकों को न सिर्फ जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। बल्कि 20 लाख रुपये से अधिक सालाना टिकट बिक्री पर 18 फीसदी की दर से टैक्स भी देना है। हालांकि 500 रुपये से अधिक के टिकट पर ही जीएसटी देय है।
यदि कार्यक्रम निर्धारित समय के लिए है तो प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन कराके अनुमानित एडवांस टैक्स जमा कराना होता है। अमर उजाला को सूचना मिली कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े महानाट्य का आयोजन जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराए बिना हो रहा है तो इसकी पड़ताल की गई। सूचना सही थी इसलिए आयोजकों से लेकर स्टेट जीएसटी अफसरों में हड़कंप मच गया।
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महानाट्य जाणता राजा की फाइल फोटो
अफसरों को जैसे सांप सूंघ गया
‘जाणता राजा’ का आयोजन चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हो रहा है। यह स्थान स्टेट जीएसटी के सेक्टर-17 में आता है। जीएसटी का प्रावधान कहता है कि जिस भी सेक्टर में कोई आयोजन होगा, सेक्टर के अधिकारी यह पड़ताल करने जाएंगे कि जीएसटी में रजिस्ट्रेशन है या नहीं। आयोजन से पूर्व एडवांस टैक्स जमा किया गया या नहीं। इस आयोजन में संघ, सरकार और प्रशासन की भूमिका जानकर स्टेट जीएसटी के अफसर मौके पर छानबीन करने तक नहीं गए।
सेक्टर-17 के असिस्टेंट कमिश्नर प्रशांत सिंह ने माना कि मंगलवार दोपहर ढाई बजे तक आयोजकों की ओर से रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। ज्वाइंट कमिश्नर एके श्रीवास्तव ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें इस आयोजन की जानकारी ही नहीं है, जबकि ठीक एक दिन पहले यहां के सभी अधिकारियों को एक हजार रुपये के टिकट बांटे गए थे। आखिरकार अमर उजाला के सवाल के बाद वे हरकत में आए और असिस्टेंट कमिश्नर को टैक्स की देयता पता करने को कहा।
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महानाट्य जाणता राजा की फाइल फोटो
भनक लगी तो कराया रजिस्ट्रेशन
जाणता राजा आयोजन समिति को अमर उजाला की पड़ताल की भनक लग चुकी थी। इसके बाद आयोजकों ने आनन फानन में हेडगेवार जन्मशताब्दी न्यास और जाणता राजा महानाट्य आयोजन समिति के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया। रजिस्ट्रेशन कराने की जिम्मेदारी सीए दीप कुमार मिश्रा को दी गई थी।
ये है कमाई का गणित
जाणता राजा महानाट्य का मंचन देखने के लिए 6700 लोगों के एक साथ बैठने की व्यवस्था है। इसमें टिकटों को चार कैटेगरी में बांटा किया गया है। 200, 500, 1000 और 5000 रुपये। 200 रुपये के टिकट वाली 4000 सीटें हैं। 500 रुपये की 1500 सीटें, 1000 रुपये की 1000 सीटें, 5000 रुपये वाली 200 सीटें हैं। इस तरह से प्रतिदिन कुल 35.50 लाख रुपये की टिकट बिक्री बनती है। कार्यक्रम स्थल पर 200 और 500 की 10 फीसदी सीटें खाली भी मान लें तो करीब 30 लाख रुपये की टिकट बिक्री हो रही है।
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महानाट्य जाणता राजा की फाइल फोटो
टैक्स बचाने के लिए बनाया डोनर कार्ड
जाणता राजा महानाट्य आयोजन समिति के सदस्यों ने टैक्स बचाने के लिए 5000 रुपये वाली टिकट को डोनर कार्ड का नाम दे दिया। 5000 रुपये के टिकट वाली 200 सीटे हैं। इन सीटों पर बैठने वालों को टिकट न देकर उनसे पास के तौर पर 5000 रुपये लिए जा रहे हैं। सिर्फ डोनर कार्ड के जरिये रोजाना 10 लाख रुपये समिति के पास आ रहे हैं। यह आयोजन समिति की आय है। बता दें कि डोनर कार्ड पर टैक्स की देयता खत्म हो जाती है।
बदले में मनोरंजन तो कैसा दान
टैक्स मामलों में वरिष्ठ सलाहकार एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता बताते हैं कि 5000 रुपये के टिकट को डोनर कार्ड नाम देने भर से कोई चीज दान की नहीं हो जाती। डोनर कार्ड यदि 5000 रुपये का है और उसके बदले महानाट्य देखने की अनुमति दी जा रही है तो यह दान की श्रेणी में नहीं है। इस दान के बदले मनोरंजन के तौर पर सेवा हासिल की गई। स्टेट जीएसटी विभाग को पड़ताल करनी चाहिए कि यह कैसे हो सकता है? स्टेट जीएसटी के अफसर भी मानते हैं कि टैक्स चोरी करने के लिए इस तरह का खेल किया गया। मामला हाईप्रोफाइल लोगों से जुड़ा है इसलिए ऊपर के अधिकारी के आदेश के बगैर किसी तरह की जांच संभव नहीं है।
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जिम्मेदारों का पक्ष
आयोजन से पहले रजिस्ट्रेशन कराना था लेकिन व्यस्तता की वजह से रह गया होगा। मंगलवार दोपहर को सीए दीप कुमार मिश्रा ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। महानाट्य का मंचन अस्पताल निर्माण के लिए किया जा रहा है। जहां कहीं टैक्स की देयता होगी, उसे देख लिया जाएगा। - स्वतंत्र कुमार अग्रवाल, संयोजक
आयोजन से पूर्व रजिस्ट्रेशन जरूरी था। आयोजक की जिम्मेदारी होती है वह विभाग में सूचना दे या ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराए। अब टैक्स की देयता की पड़ताल की जाएगी। - एके श्रीवास्तव, ज्वाइंट कमिश्नर, स्टेट जीएसटी
आयोजकों ने जैसे ही रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी सौंपी, उनका काम कराया गया। बिक चुके टिकटों के टैक्स इनवाइस काटे जाएंगे। जिस पर टैक्स देयता होगी, वह अदा किया जाएगा। - दीप कुमार मिश्रा, चार्टर्ड एकाउंटेंट
अफसरों को दिया टिकट बिक्री का टारगेट
जाणता राजा के महंगे टिकट बिकवाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सरकारी कार्यालयों को टारगेट सौंपा गया। स्टेट जीएसटी के एक अफसर बताते हैं कि प्रशासन के एक बड़े अधिकारी ने ही 1000 रुपये कीमत वाले 100 टिकट सोमवार को भिजवाए थे। इन टिकटों की अफसरों के बीच बिक्री करवानी थी। कई अफसरों को तो जबरन टिकट दिए गए। इसी तरह अन्य सरकारी कार्यालयों में टारगेट देकर टिकटों की बिक्री करवाई जा रही है।