साइलेंस जोन (शांत क्षेत्र) से सौ मीटर की परिधि में आतिशबाजी पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन ने भी गाइड लाइन जारी कर दी है। दो नवंबर को मिले पत्र में जिलाधिकारी और एसएसपी को इस आदेश का पालन कराने को कहा है। कानपुर में भी लड़ी वाले पटाखों की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है। ये ऐसे पटाखे हैं, जिनमेें एक साथ कई पटाखे जुड़े होते हैं और काफी देर तक एक साथ छूटते हैं।
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उत्तर प्रदेश शासन के सचिव भगवान स्वरूप ने जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि ध्वनि प्रदूषण (विनियम एवं नियंत्रण) नियम के अनुसार अस्पताल, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला हेल्थ केयर सेंटर, शैक्षणिक संस्थान, न्यायालय, धार्मिक स्थलों के आसपास आतिशबाजी पर रोक लगाई जाए। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कुलदीप मिश्रा का कहना है कि साइलेंस जोन चिह्नित कर लिए गए हैं। आतिशबाजी रोकने के लिए जिला प्रशासन का पूरा सहयोग किया जाएगा। एडीएम सिटी विवेक कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि लाइसेंसधारकों से पटाखों की लड़ी न बेचे जाने को कहा जाएगा।
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देर से आई गाइड लाइन, लड़ी वाले पटाखों की बिक्री रोक पाना चुनौती
अभी थोक पटाखा बाजार क्राइस्टचर्च कॉलेज ग्राउंड पर लगा है। पटाखा बाजार में धड़ल्ले से लड़ी की बिक्री हो रही है। सोमवार से जिले के 57 स्थानों पर फुटकर पटाखा दुकानें भी लग जाएंगी। ज्यादातर फुटकर पटाखा लाइसेंस धारक भी आतिशबाजी के साथ पटाखों की लड़ी भी खरीद चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने लड़ी वाले पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने की चुनौती रहेगी। इसकी एक वजह यह भी है कि शासन की गाइड लाइन पटाखा लाइसेंस जारी होने के बाद आई है। दुकानदार सभी तरह के पटाखे खरीद चुके हैं। गाइड लाइन में यह भी कहा गया है कि बीएसए और डीआईओएस बच्चों को पटाखे के दुष्प्रभावों के बारे में बताएं। शनिवार से स्कूल-कालेजों में छुट्टी हो गई है।