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मां की कोख में ही क्रांतिकारी बन गईं थीं ये महिला, जीवन के ये राज जानकर करेंगे सैल्यूट

Wed, 08 Mar 2017 04:43 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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सुभाषिनी अली
एक ऐसी महिला जिसने मां की कोख से ही क्रांतिकारी विचारधारा को अपना लिया। दलित, शोषित और गरीब महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली इस महिला ने वो काम कर दिखाया जो आगे चलकर सबके लिए प्रेरणा बन गया। हम बात कर रहे हैं मशहूर अभिनेत्री और इंडियन डेमोक्रेटिक वूमन्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सुभाषिनी अली की। सुभाषिनी अली आजाद हिन्द फौज की कैप्टन रहीं स्वर्गीय डॉ. लक्ष्मी सहगल की बेटी, फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली की पत्नी और बंटी-बबली फिल्म के डायरेक्टर शादी अली की मां हैं।
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मां की कोख में ही क्रांतिकारी बन गईं थीं सुभाषिनी, जानें इनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें...

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सुभाषिनी अली
सुभाषिनी अली का जन्म आजाद भारत के कोलकाता शहर में दिसंबर 1947 को हुआ था। सुभाषिनी के पिता कर्नल प्रेम सहगल और मां आजाद हिन्द फौज की कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल आजादी के बाद कानपुर आ गए। वर्तमान समय में सुभाषिनी कानपुर शहर में ही रह रही हैं। सुभाषिनी अली 1989 में सांसद बनी थीं। उन्होंने कानपुर नगर से चुनाव लड़ा और भाजपा के जगतवीर सिंह द्रोण को हराकर लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। 1991 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें सुभाषिनी को हार मिली। बाद में वह फिल्मों से जुड़ीं लेकिन माकपा से जुड़ाव बना रहा। वह सदस्य के तौर पर काम करती रहीं।
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मां की कोख में ही क्रांतिकारी बन गईं थीं सुभाषिनी, जानें इनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें...

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अशोका फिल्म में शाहरुख की मां के रोल में सुभाषिनी
सुभाषिनी अली की शादी मशहूर फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली से हुई थी। मुजफ्फर अली ने उमराव जान जैसी क्लासिक फिल्म से हिन्दी सिनेमा की सूरत ही बदल दी थी। सुभाषिनी नेता होने के साथ एक बेहतरीन कलाकार भी हैं। सुभाषिनी ने ‘अशोका’, ‘गुरु’, ‘आमू’ जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया था। साल 2001 में आई फिल्म अशोका में किंग खान शाहरुख की मां को रोल निभाकर सुभाषिनी ने सबको हैरत में डाल दिया था।  फिल्म उमराव जान में महिला पात्रों के कॉस्ट्यूम्स सुभाषिनी ने ही डिजाइन किए थे। 

मां की कोख में ही क्रांतिकारी बन गईं थीं सुभाषिनी, जानें इनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें...

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सुभाषिनी और मुजफ्फर अली
मुजफ्फर और सुभाषिनी का अब तलाक हो चुका है। सुभाषिनी के बेटे शाद अली इस समय बॉलीवुड के सफल फिल्म निर्माताओं में से एक हैं। शाद अली ने ‘साथिया’, ‘बंटी बबली’, ‘झूम बराबर झूम’, ‘ओके जानू’, ‘दिल से’, ‘किल दिल’, ‘रावण’ जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन किया है।  
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मां की कोख में ही क्रांतिकारी बन गईं थीं सुभाषिनी, जानें इनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें...

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सुभाषिनी अली और मुजफ्फर अली
सुभाषिनी के बेटे शाद अली मुंबई में ही रह रहे हैं। सुभाषिनी ने महिलाओं के हक की आवाज ऐसी उठाई कि सरकारें तक हिल गईं। साल 20016 में सुभाषिनी ने एक ऐसा संगठन बनाया जिसमें सैकड़ों महिलाओं को जोड़कर एक बड़ी ताकत बना ली।  दलित शोषण मुक्ति मंच बनाकर सुभाषिनी ने बलात्कार, एसिड अटैक, घरेलू हिन्सा से पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाया। सुभाषिनी आज निर्बल महिलाओं की बड़ी शक्ति बन चुकी हैं। 
 
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मां की कोख में ही क्रांतिकारी बन गईं थीं सुभाषिनी, जानें इनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें...

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सुभाषिनी अली
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो की सदस्य एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने गरीब महिलाओं के उत्थान ने के लिए बड़े-बड़े काम किए। अपने संगठन के बल पर उन्होंने ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं की आवाज सरकार तक पहुंचाने का बीड़ा उठा। समाज में सुभाषिनी का योगदान सर्वश्रेष्ठ रहा है। 
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