15 फरवरी साल 2014...चरम पर चुनावी माहौल और कानपुर से संबंध रखने वाले मीट कारोबारी के 15 ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी। इसके बाद सामने आया एक ऐसा नाम जिसके बारे में शायद ही लोग इससे पहले कुछ जानते हों छापेमारी के बाद से ही वह सुर्खियों में आ गया, नाम था... मोइन कुरैशी। कानपुर से संबंध रखने वाले मोइन कुरैशी का जन्म रामपुर में हुआ था। मोइन की शिक्षा दून स्कूल और सेंट स्टीफेंस से की हुई।
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डेमो पिक
15 फरवरी 2014 को चरम पर लोकसभा के चुनावी माहौल के बीच इसी दिन कानपुर से ताल्लुक रखने वाले मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के 15 ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी हुई। इसके बाद जो सच सामने आया उससे जन्म हुआ एक चुनावी मुद्दे का। इसी को लेकर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने इशारे ही इशारे में एक रैली में कहा ...‘क्या सच्चाई सामने नहीं आनी चाहिए?’।
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इसके बाद मचा सियासी घमासान...जिसमें आरोपों का दौर शुरू हुआ। भाजपा ने विपक्ष के एक नेता का इशारो में नाम लेते हुए मोइन कुरैशी से संबंध होने की बात कही। अब जानिए मोइन कुरैशी के शुरुआती दौर से बारे में... रामपुर में जन्मा मोइन अख्तर कुरैशी उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखता है। साल 1993 में उसने कानपुर और रामपुर में छोटा सा बूचड़खाना खोला था और जल्द ही वह देश का सबसे बड़ा मांस कारोबारी बन बैठा।
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मोइन कुरैशी
पच्चीस सालों से मोइन ने निर्माण और फैशन समेत कई क्षेत्रों में 25 से ज्यादा कंपनियां खड़ी कर लीं। उसके खिलाफ कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार में शामिल होने के कई आरोप लगे और जांच हुई। इसके साथ-साथ उसने हवाला के जरिए बड़ा लेनदेन किया। उस पर सीबीआई अफसरों, राजनेताओं समेत कई अधिकारियों को रिश्वत देने के भी आरोप लगे। मोइन कुरैशी का नाम सबसे पहले 2014 में सामने आया, जब यह पता चला कि 15 महीने में कुरैशी कम से कम 70 बार तत्कालीन सीबीई चीआफ रंजीत सिन्हा के घर पर गया था।
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moin qureshi
- फोटो : SELF
आलोक वर्मा और अस्थाना के बीच मौजूदा विवाद में हैदराबाद के बिजनसमैन सतीश बाबू सना का नाम भी सामने आया है। सना ने पिछले साल ईडी को कथित तौर पर बताया था कि उसने सिन्हा के जरिए एक सीबीआई केस में फंसे अपने दोस्त को जमानत दिलाने के लिए 1 करोड़ रुपये कुरैशी को दिए थे। साल 2014 में पता चला कि कुरैशी और एक अन्य सीबीआई डायरेक्टर एपी सिंह के बीच मैसेज का आदान-प्रदान हुआ था। सिंह 2010 से 2012 तक एजेंसी के हेड रहे।
आयकर विभाग और इडी ने मामले की जांच की और पिछले साल फरवरी में सीबीअाई ने भी सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया, जिससे कुरैशी के साथ उनके संबंधों की जांच हो सके। आरोपों के चलते सिंह को संघ लोक सेवा आयोग में सदस्य की अपनी पोस्ट छोड़नी पड़ी। एपी सिंह भी लगातार आरोपों से इनकार करते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है।