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देश-दुनिया के लिए नजीर बना 'जखनी गांव', आप भी ले सकते हैं सीख

Tue, 19 Jun 2018 09:15 PM IST
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
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जखनी गांव का नजारा

'बढ़ती गर्मी और घटता जलस्तर' इससे केवल गले ही नहीं धरती भी प्यासी है। देश के कई हिस्सों में जलस्तर कम होने की खबर सुनाई पड़ना आज आम बात हो गई है। लेकिन यूपी में बांदा जिले के एक गांव के लोगों ने ऐसी मिसाल पेश की है जिसका कोई सानी नहीं है। आज ये गांव और इस गांव के लोग देश और समाज के लिए एक नजीर बन गए हैं। अब आपको ले चलते हैं गांव जखनी की यात्रा पर...

 

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जखनी गांव का नजारा - फोटो : अमर उजाला

बुंदेलखंड में बांदा जिले का गांव जखनी इन दिनों, उस समय चर्चा में है जब देश के अधिकांश हिस्सों में जलस्तर कम हो रहा है वहीं यहां के लोगों के प्रयास से पानी का स्तर बढ़ रहा है। ये बात शायद ही आपको एक पल के लिए हैरान कर दे लेकिन यह वह सच है जिसे आप देख सकते हैं और एक सीख भी ले सकते हैं। जखनी गांव के लोगोंं ने पानी के स्तर को सुधारने के लिए किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं ली। बावजूद इसके वो कारनामा कर दिखाया जिसे करने में शायद सरकारें भी हांफ जाती। गांव के कुंए में छह फीट पर पानी है।

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डेमाे पिक

यह जलस्तर दिन पर दिन और सुधरता नजर आ रहा है। बढ़ता जलस्तर और तर होते गले अपने आप में एक पत्थर से पानी निकालने जैसी कहावतों को पूरा करते दिखाई देते हैं। गांव के लोग इस खुशी में लोकनृत्य कर रहे हैं। तालाबों में नौकाविहार देख शायद एक बार आपकी आंखे भी भरोसा न करें लेकिन इस सच को आप चाह कर भी झुठला नहीं सकते।

 

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अशोक अवस्थी - फोटो : अमर उजाला
पानी से लबालब भरे बड़ी दाई तालाब, रद्दू बाबा तालाब, रसिया तालाब, गड़रिया तालाब, नरसिंह तालाब, बड़ा तालाब और जखनिया तालाब अपने आप में बसंत सा मौसम बयां कर रहे हैं। आपको बता दें कि इन तालाबों में पानी को रोकने के लिए किसी भी प्रकार की कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। बढ़ता जलस्तर लोगों की हिम्मत की कहानी है।
 
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जखनी गांव का नजारा
जखनी गांव में इन दिनों 33 कुएं हैं। यह सभी पानी से भरपूर हैं। मात्र 10 फीट की रस्सी से पानी निकाला जा रहा है। उधर, भूजलस्तर मेनटेन रहने का किसान भरपूर लाभ उठा रहे हैं। ज्यादातर किसानों ने खेत में छोटे व्यास का लगभग 15 फिट गहरा गड्ढा खोद लिया है। इसे चारों ओर पक्की ईंट से बांध दिया गया है। यह छोटे कुएं के रूप में काम आ रहे हैं। इनमें मात्र 5 फिट नीचे पूरे साल पानी मिल रहा है। किसान इससे खेत की सिंचाई कर रहे हैं।

 
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डेमाे पिक
आसपास आबाद गांव घुरौंडा, जमरेही, सहेवा, बरसड़ा खुर्द, बरसड़ा बुजुर्ग आदि में भी भूजल स्तर ज्यादा नहीं घट पाया। यहां भी किसानों ने मेड़बंदी और कुएं खोदकर सिंचाई का बंदोबस्त किया है। जलग्राम समिति में संयोजक उमाशंकर पांडेय, प्रबंधक अशोक अवस्थी, अध्यक्ष निर्भय सिंह, महामंत्री नसीरुद्दीन व दिलेर सिंह, निदेशक अली मोहम्मद सहित 15 सदस्य हैं। समिति मेड़, तालाब, कुंआ, नाली आदि के रखरखाव पर पूरा ध्यान दे रही है।
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