विनर-रनर का फार्मूला चला तो सपा-बसपा गठबंधन के बाद बुंदेलखंड में दोनों को बराबरी की सीटें मिलेंगी। पिछले लोकसभा चुनाव (2014) में बुंदेलखंड की दो-दो सीटों पर सपा और बसपा के प्रत्याशी रनर (दूसरे नंबर) रहे थे। बुंदेलखंड को बसपा और सपा दोनों ही अपना गढ़ मानती है। करीब एक दशक की चुनावी तस्वीर ऐसी ही रही है। वर्ष 2014 के पूर्व यहां भाजपा की दाल नहीं गल पाई।
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लोकसभा से लेकर विधानसभा, जिला पंचायत और स्थानीय निकायों में भी सपा-बसपा की ही वर्चस्व रहा है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में चली मोदी और भाजपा की आंधी ने दोनों दलों के लहराते परचमों को उखाड़ फेंका। इसके बाद भी दोनों दल बुंदेलखंड में अपने को दूसरे स्थान पर स्थापित करने में कामयाब रहे। चारों सीटों पर दोनों के प्रत्याशी दो-दो सीटों पर रनर बने।
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पिछले चुनावों में हमेशा एक-दूसरे की धुर विरोधी रही बसपा-सपा के अब एक साथ आ जाने से इसी वर्ष होने जा रहे लोकसभा के चुनाव के समीकरण बुंदेलखंड में बदले नजर आएंगे। माना जा रहा है कि दोनों के बीच सीटों के बंटवारे का फार्मूला यह रहेगा कि जहां जिस पार्टी का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर (रनर) रहा है, वहां उसी को सीट सौंप दी जाए।
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यही मानक अपनाया गया तो दोनों बराबरी के साझेदार बनेंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में बांदा-चित्रकूट और जालौन-उरई सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर थी। हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी और झांसी-ललितपुर सीट पर सपा रनर रही। चारों सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी।
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पिछले लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की चारों सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई थी। बांदा-चित्रकूट से भैरो प्रसाद मिश्र, हमीरपुर-महोबा से पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, जालौन-उरई से भानु प्रताप सिंह वर्मा और झांसी-ललितपुर से उमा भारती विजयी हुई थीं। बांदा-चित्रकूट में भाजपा ने बसपा के आरके सिंह पटेल को 1,15,788 मतों से हराया था। हमीरपुर-महोबा में भाजपा ने सपा के विशंभर प्रसाद निषाद को 2,65,834 वोटों से पराजित किया था।
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जालौन-उरई में भाजपा ने बसपा के ब्रजलाल खाबरी को 2,78,202 वोटों से पछाड़ा था। झांसी-ललितपुर में उमा भारती ने सपा के चंद्रपाल को 1,90,467 वोटों से हराया था। भाजपा को कुल 19,19,515 वोट मिले, जबकि बसपा और सपा दोनों को 18 लाख 21 हजार 27 वोट मिले थे। भाजपा दोनों दलों से 98,488 वोट अधिक पाई थी।