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सतुवाही अमावस्या- सत्तू दान, गंगा स्नान व कन्या भोज से मिलता अक्षय पुण्य, यह भी हैं मान्यताएं

Mon, 16 Apr 2018 03:11 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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बैसाख मास की अमावस्या को सतुवाही अमावस्या के रूप में भी मनाया जाता है। सतुवाही अमावस्या को लेकर अनेक पौराणिक मान्यताएं हैं। इस दिन सत्तू दान, गंगा स्नान, ब्रह्मणों व कन्या भोज से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गर्मी से राहत देने वाली चीजों को दान करने का भी विधान है।

 
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यहां लगता अनोखा मेला

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सतुवाही अमावस्या के दिन प्रत्येक वर्ष कानपुर के नवाबगंज स्थित मां उजियारी देवी मंदिर में मेले व माता के जागरण का आयोजन किया जाता है। विमलेश श्रीवास्तव ने बताया कि रात भर चलने वाले जागरण में क्षेत्रवासी ही नहीं दूर दूर से लोग आते हैं।
 
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वर्षों पुराना है मंदिर में लगने वाले मेले का इतिहास

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नवाबगंज क्षेत्र निवासी लालजी गुप्ता व पारस जैन ने बताया कि यहां लगने वाले मेले का इतिहास तो यहां के बुजुर्ग भी नहीं बता सकते। कहा जाता है कि 150 वर्ष से भी पुराना है यहां आयोजित होने वाला मेला।

 

मंदिर में विराजमान हैं मां शीतला

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मां उजियारी देवी मंदिर में शीतला माता विराजमान हैं। शहर में मां शीतला के मंदिर गिने चुने ही हैं। बसौड़ा अष्टमी पर शीतला माता पर बासी खाने का भोग लगाने व माता से निरोगी काया का वरदान मांगने के लिए दूर-दूर से भक्त मां के दर्शन को आते हैं।
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यहां प्रकट हुई थी मां की प्रतिमा

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वर्षों से मंदिर में माता के दर्शन को आ रहे भक्तों का मानना है कि यहां माता की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। मां के भक्तों ने ही मंदिर को भव्यता प्रदान की है।
 
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सतुवाही अमावस्या पर लगता ये भोग

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सतुवाही अमावस्या के दिन माता को फल, मिष्ठान और ड्राई फ्रूट्स का भोग लगाया जाता है। साथ ही मेला व माता के जागरण की शुरुआत कन्या भोज से की जाती है। उसके बाद विशाल भोज का आयोजन किया जाता है। रात में रंगा-रंग कार्यक्रमों केसाथ माता के जागरण व भजन कीर्तन की शुरुआत होती है। कार्यक्रम का आयोजन दीपक गौतम, सुशील गुप्त, शुभम सविता, सुनील श्रीवास्तव, दीपक बाथम, रितेश पाण्डेय आदि की देखरेख में किया जाता है।
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