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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का आवास घेर लिया था श्याम बिहारी ने, चचा के नाम से थे मशहूर

Wed, 21 Apr 2021 12:17 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ श्याम बिहारी मिश्र - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के मुखिया श्याम बिहारी मिश्र व्यापारी हित में पार्टी लाइन के खिलाफ खड़े हुए। 1976 में श्याम बिहारी मिश्र ने उद्योग व्यापार मंडल की नींव रखी और फिर उसे देश के कोने-कोने तक ले गए। गोवा तक में व्यापार मंडल की शाखा है।

 
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श्याम बिहारी मिश्र - फोटो : amar ujala
नींव तब रखी गई, जब व्यापारकर (तब विभाग इसी नाम से जाना जाता था) का एक कर्मचारी बाजार में पहुंचता और धड़ाधड़ दुकानों के शटर गिर जाते थे। इसके खिलाफ श्याम बिहारी ने अकेले आवाज उठाई। हर बाजार में व्यापार मंडलों का गठन किया। इसके बाद पूरे प्रदेश और फिर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन ने आकार लिया।

 
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श्याम बिहारी मिश्र - फोटो : amar ujala
एक बार व्यापारियों की मांगें लेकर बड़ा आंदोलन हुआ। तब श्याम बिहारी कांग्रेस में थे। इन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ न सिर्फ प्रदर्शन किया, बल्कि इंदिरा गांधी के दिल्ली स्थित सरकारी आवास तक पहुंच गए और कुछ कारोबारियों के साथ घेराव भी किया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फिर वह व्यापारी समाज के आंखों के तारे हो गए।

 

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श्याम बिहारी मिश्र - फोटो : फाइल फोटो
कुछ सीटों पर व्यापारियों का था उतारा 
श्याम बिहारी ने उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले खुद लोकसभा का चुनाव लड़ा और कुछ सीटों पर अपने व्यापारी साथियों को भी उतार दिया। यह अलग बात थी कि सभी की जमानत जब्त हो गई। उनका मानना था कि सत्ता में भागीदारी बिना व्यापारी समाज की मांगें पूरी करवाना मुश्किल है। बाद में वो भाजपा में शामिल हो गए और बिल्हौर लोकसभा सीट से चार बार सांसद चुने गए। संसद में व्यापारियों की बात रखी। उद्योग व्यापार मंडल के चेयरमैन मणिकांत जैन बताते हैं कि श्याम बिहारी ने कारोबारियों को हक के लिए लड़ना सिखाया। उनके दिलों से नौकरशाही का डर हटाया।

 
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राष्ट्रपति के साथ श्याम बिहारी मिश्र - फोटो : amar ujala
न खाता न बही, जो चचा श्याम बिहारी कहें सही
कारोबारियों के बीच एक जुमला खूब उछाला जाता है.. न खाता न बही, जो चचा श्याम बिहारी कहें सही...। यानी चचा ने अपनी तरह से व्यापार मंडल चलाया। 1993 में चुनाव के दौरान व्यापार मंडल से सुरेंद्र मोहन अग्रवाल अलग हुए और अपना अलग संगठन बना लिया। इसके बाद नीरज चतुर्वेदी अलग हुए और व्यापार मंडल फिर बंट गया और फिर 2005 में लखनऊ में अधिवेशन के दौरान बनवारीलाल कंछल ने श्याम बिहारी का साथ छोड़कर अपना समानांतर संगठन खड़ा कर लिया।
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