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शनि अमावस्याः दान-पुण्य कर दूर करें पितृ दोष, पीड़ा से मुक्ति के लिए अपनाएं ये 5 विधि

Fri, 04 Jan 2019 06:33 PM IST
gaurav gaurav यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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शनिवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष अमावस्या है। इसे शनैश्चरी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन दान-पुण्य से पितृ दोष दूर होंगे। इसके अलावा केतु और शनि की पीड़ा से भी मुक्ति पाई जा सकती है। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि इस दिन मूल नक्षत्र पड़ने के कारण यह तिथि काफी असरकारक हो जाती है। इस दिन किए गए उपाय बहुत ही प्रभावी होते हैं। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है।
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अमावस्या तिथि भी राहु और केतु के प्रभाव के कारण मानी जाती है। ऐसे में केतु और शनि की शांति के लिए इस दिन पका अन्न दान किया जा सकता है।  इसके अलावा पितृ दोष का निवारण भी किया जा सकता है।
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सामान्य गृहस्थ पकी हुई काली उड़द और पके चावल का दान करें। इससे उनको लाभ होगा। इसके साथ ही पितृ दोष का पूजन भी किया जा सकता है। इसके लिए पत्तल पर जौ, चावल, काले तिल, खीर और नींबू को रखकर पीपल के वृक्ष के नीचे दोपहर में रखना होगा। इससे पितृ दोष खत्म हो जाएगा। 

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शनिदेव के नाम जाप कर सक ते हैं
शनिदेव के 10 नाम हैं। इसमें कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद, पिप्पलाद। इसके अलावा वेद पुस्तकों से या अन्य किसी वेदों के जानकार से शनि मंत्र ले उसका जाप कर सकते हैं।  
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इस विधि से करें मंत्र का जाप
- शनिवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद एक साफ स्थान पर शनिदेव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- शनिदेव के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ये दीपक पूजा समाप्त होने तक जलते रहना चाहिए।
- शनिदेव को नीले रंग के फूल अर्पित करें और इसके बाद रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जाप करें।
- कम से कम पांच माला जाप अवश्य करें। इस प्रकार शनिदेव की पूजा करने से आपकी परेशानियां दूर हो सकती हैं।
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