नाबालिगों को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाने वाला भाजपा नेता रामबिहारी उनकी मां-बहनों पर भी बुरी नियत रखता था। इसका खुलासा एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों नाबालिगों ने किया। दोनों किशोरों ने पुलिस को बताया कि जब तक रामबिहारी उनके अश्लील वीडियो की आड़ में उनका यौन उत्पीड़न करता रहा, तब तक उसकी हरकतें बर्दाश्त की गई लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह घर में रहने वाली मां और छोटी बहनों को भी साथ लाने की धमकी देने लगा था।
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पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
उनकी इज्जत बचाने के लिए एक बार तो नेता को जान से मारने का मन सा बन गया, फिर गुनाहों के दलदल में फंसने के बजाए उस हार्ड डिस्क को ही चोरी करने का फैसला किया, जिसमें उनके अश्लील वीडियो कैद थे। पुलिस का कहना है कि रामबिहारी की ओर से दिया गया चोरी का प्रार्थना पत्र ही पूरे मामले के खुलासे का कारण बना। जिस वीडियो क्लिप को रामबिहारी धमकाने के लिए इस्तेमाल करता था, उसी ने आज उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
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पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी
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करता और कराता भी था शौक
वहीं इलाकाई लोगों ने बताया कि रामबिहारी पूर्व में लेखपाल और भाजपा नेता जरूर था लेकिन मदद सिर्फ उन्हीं लोगों की करता था, जिनके परिवार का कोई नाबालिग उसके शौक पूरे करते था। पीड़ित नाबालिगों ने भी कभी रुपये तो कभी जूते आदि देने की बात स्वीकारी है।
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आरोपी के घर पहुंचे एसपी
- फोटो : अमर उजाला
लेखपाल पद से ही हुआ था सेवानिवृत्त
रामबिहारी अपनी नौकरी के दौरान कुछ समय के लिए किन्हीं कारणों से कानूनगो के पद पर कार्यरत रहा था लेकिन उसकी सेवानिवृत्ति लेखपाल पद से ही हुई थी। इसकी पुष्टि तहसीलदार राजेश विश्वकर्मा ने की। रौब गांठने के लिए वह स्वयं को कानूनगो भी बताता था।
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पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी
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दबाव के लिए अफसरों की करता था शिकायत
रामबिहारी से नाबालिग और मोहल्ले के लोग ही नहीं परेशान थे बल्कि पुलिस भी उससे दूरी बनाकर ही रखती थी। पुलिस पर अपना दबाव बनाने के लिए वह आए दिन पुलिस अधिकारी की शिकायतें किया करता था। इन अधिकारियों में कोतवाली में तैनात रहे एक सीओ और इंस्पेक्टर का नाम शामिल है।
रात भर घनघनाते रहे थे भाजपा नेताओं के फोन
भाजपा भले ही अब रामबिहारी से अपना पल्ला झाड़ रही हो लेकिन सोमवार की जिस रात उसे पुलिस पकड़कर कोतवाली लाई, उस पूरी रात नगर के भाजपा नेताओं के फोन थानेदार और दरोगाओं के मोबाइल पर घनघनाते रहे और एफआईआर दर्ज होने के बाद ही फोन आना बंद हुए।