लखनऊ से कानपुर जा रही मालगाड़ी के 16 डिब्बे गुरुवार शाम 6 बजे शुक्लागंज में तेज धमाके के साथ डिरेल हो गए। इस दुर्घटना में 10 डिब्बे पलट गए जबकि 6 डिब्बे पटरी से उतर गए। दुर्घटना के बाद ओएचई लाइन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। अप लाइन की गाड़ियां जहां की तहां रोक दी गईं। हादसे के पीछे की वजह पटरी टूटना बताया जा रहा है। शुक्लागंज में छमकनाली के पास नियंत्रित गति से जा रही मालगाड़ी के डिब्बे अचानक पलटने से हड़कंप मच गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग रेलवे ट्रैक पर दौड़ गए। दुर्घटना के बाद कानपुर-लखनऊ का रेल संचालन प्रभावित हुआ है। रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच कर रहे हैं।
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साजिश कौन रच रहा है?
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शुक्लागंज के पास मालगाड़ी के डिब्बे पलटे
- फोटो : अमर उजाला
रेल हादसों का केंद्र कानपुर ही क्यों बन रहा है? रेल ट्रैक काटकर लोगों को मारने की साजिश कौन रच रहा है? रेल हादसों से किसको फायदा हो रहा है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो जनता के जेहन में हर रोज उठ रहे हैं। कानपुर में दो महीने के अंदर दो बड़ी रेल दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पुखरायां रेल हादसे में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि 15 दिन पहले हुए रूरा रेल हादसे के बाद 100 लोग घायल हो गए थे। कानपुर आये रेलमंत्री सुरेश प्रभु रेल हादसे के बारे में कुछ भी बोलना नहीं चाहते। हर दिन पटरी चटकने की सूचनाएं सामने आ रही हैं।
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नहीं तो रेल हादसों में जानें जाती रहेंगी
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शुक्लागंज में मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरे
- फोटो : अमर उजाला
रेल मंत्रालय आखिर कर क्या रहा है? रेलवे ट्रैक की सुरक्षा पर ध्यान देना इस समय सबसे बड़ी जरूरत है। गुरुवार को शुक्लागंज में हुई दुर्घटना से एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि रेलवे को अपना टेक्निकल और सिक्योरिटी सिस्टम अपडेट करना होगा नहीं तो रेल हादसों में जानें जाती रहेंगी।
डिब्बों के पटरी से उतर जाने से रेलवे में हड़कंप मचा हुआ है। प्रभावित ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया है। डीआरएम मौके पर रवाना हो गए। हादसे से करीब दर्जन भर ट्रेनें प्रभावित रहेंगी। आम्रपाली, गोरखधाम, बिहार सम्पर्क क्रांति व साबरमती एक्सप्रेस निरस्त हो सकती है।