कानपुर में संजीत का अपहरण कर उसको मौत के घाट उतारने वाले अपहरणकर्ता शातिर एटीएम हैकर भी हैं। वह लोगों को लाखों रुपयों की चपत लगा चुके हैं। इसका मास्टरमाइंड नीलू सिंह है। नीलू और उसके साथी कई बार पुलिस के हत्थे तो चढ़े लेकिन साक्ष्य न होने से कार्रवाई नहीं हो सकी। संजीत अपहरण हत्याकांड में जब पुलिस ने तहकीकात की तो इसका खुलासा हुआ।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
बर्रा इंस्पेक्टर ने बताया कि नीलू सिंह, रामजी शुक्ला और कुलदीप का दोस्त है। ईशू को इन्हीं दोनों ने नीलू से मिलवाया था। नीलू पिछले कई वर्षों ने एटीएम हैकिंग कर रकम पार करता रहा है। सचेंडी के गज्जापुरवा निवासी नीलू के कई साथी पहले एटीएम हैकिंग में जेल जा चुके हैं लेकिन वो इतना शातिर है कि कभी पकड़ा नहीं गया। पुलिस अब उसके बैंक खाते समेत अन्य जानकारी खंगाल रही है। उसके साथ कुलदीप और रामजी शुक्ला भी शामिल रहे हैं।
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Kanpur Kidnapping Case
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किराये पर लेता था एटीएम
पुलिस के मुताबिक गरीब और मजबूर लोगों के एटीएम नीलू किराए पर लेता था। एटीएम हैकिंग कर वो इन्हीं लोगों के खातों में वो रकम ट्रांसफर करता था। फिर पैसे निकाल फरार हो जाता था। खाताधारकों को दो-तीन हजार रुपये थमा देता था। इसके अलावा वो कार्ड स्वाइप कराने के साथ टप्पेबाजी भी करता था।
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नीलू दिनरात मकान पर रुकता था
पुलिस की जांच में पता चला कि संजीत का अपहरण करने के बाद कुलदीप और ईशू लगातार नौकरी पर जाते थे ताकि किसी को शक न हो। वो रात में मकान पर रुकते थे। नीलू सिंह कोई नौकरी नहीं करता था। इसलिए वो 24 घंटे मकान में रहता था। उसके साथ प्रीति भी रहती थी।
कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।