पांडु नदी में संजीत के शव की तलाश में जुटी पुलिस और पीएसी को 60 घंटे के बाद भी सफलता नहीं मिली। शनिवार को करीब 15 किमी तक की नदी को खंगाला गया लेकिन शव का पता नहीं चल सका है। 26 जून की रात संजीत की हत्या के बाद अपहर्ताओं ने शव को बोरी में बांध कर पांडु नदी में फेंक दिया था। एक माह बीतने के बाद जब इस बात का खुलासा हुआ तो संजीत के शव की खोज शुरू की गई।
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शव की तलाश में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इसी क्रम में शनिवार को भी पीएसी ने बिधनू, साढ़ और महाराजपुर थाना क्षेत्र तक तीन स्टीमरों से शव की तलाश की। शुक्लागंज, झांसी से बुलाए गए 35 गोताखोरों को भी लगाया गया है। 60 घंटों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान गोताखोरों को 50 से अधिक प्लास्टिक की बोरियां मिलीं। इन बोरियों से जानवरों के क्षति विक्षत शव ही निकले। देर शाम तक टीमें शव की तलाश में जुटी रहीं।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
बाढ़ ने सर्च टीम की मुश्किलें बढ़ाईं
बरसात के मौसम में पांडु नदी में आई बाढ़ ने सर्च टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुजैनी पुल से करीब नौ किमी दूर बिनगवां के पास बने अस्थायी पुल पर पहुंचकर टीम ने नदी में शव की तलाश शुरू की। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने टीम को बताया कि करीब दो दिन पहले तक नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा था। ऐसे में शव के बह कर आगे निकल जाने की आशंका है।
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शव मिलने के चांस न के बराबर
विशेषज्ञों का मानना है कि एक माह बाद शव के मिलने की उम्मीद न के बराबर हैं। डॉ. कीर्तिवर्धन सिंह के मुताबिक पानी में फेंकी गए शव की सबसे पहले चर्बी और फिर मांस पेशियां क्षय होने लगती हैं। शव के फूलने व बोरी के सड़ने से उसके फटने के भी चांस हैं। ऐसे में जलीय जीवों के शव को खाने की भी बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। जानवर भी नदी में उतराते शव को खींच कर बाहर लाकर खा सकते हैं। इन सभी पहलुओं को देखा जाए तो शव के मिलने के चांस न के बराबर ही हैं।
बता दें कि कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था।