कानपुर में संजीत का अपहरण करने के तीसरे दिन मुख्य अपहर्ता कुलदीप और ईशु उसके घर पहुंचे थे। दोनों ने परिजनों से पूछा था कि संजीत के अपहरण की जानकारी पुलिस को दी है या नहीं। इस पर परिजनों ने पुलिस की मदद लेने की बात कही तो कुछ ही देर बाद दोनों चले गए। इसका खुलासा पुलिस की जांच में हुआ है।
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शव की तलाश में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
तब लगा था कि नहीं फंसेंगे
22 जून की शाम संजीत का अपहरण करने के बाद अपहर्ताओं ने उसको बंधक बना लिया था। कुलदीप और ईशु 25 जून को संजीत के घर पहुंचे थे। दोनों ने परिजनों से बताया कि काफी दिनों से संजीत से बातचीत ही नहीं हुई है। इस पर परिजनों ने बताया कि राहुल यादव के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
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kanpur kidnapping case
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पुलिस उसको हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे दोनों को लगा कि अब वे नहीं पकड़े जाएंगे। आसानी से फिरौती की रकम भी वसूल लेंगे और राहुल जेल जाएगा। दोनों संजीत का पता लगने पर खुद जानकारी देने की बात कहकर चले गए थे। इसके बाद से शातिर संजीत के दोस्त से पुलिस कार्रवाई के बारे में जानकारी लिया करते थे।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
यहां भी पुलिस नाकाम रही
सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की थी। इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी पुलिस के हाथ लगे थे कि जिनसे आरोपियों तक आसानी से पहुंचा जा सकता था। यहां भी पुलिस फेल रही। आशंका यह भी है कि पुलिस ने कुलदीप से भी पूछताछ की थी। कोई साक्ष्य न मिलने पर उसे छोड़ दिया गया। हालांकि अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था।