संजीत अपहरण हत्याकांड के आरोपियों ने बचने की खूब कोशिश की लेकिन एक गलती से पुलिस उन तक पहुंच गई। दरअसल उन्होंने संजीत के एक दोस्त को उसी नंबर से कॉल कर दी, जिससे फिरौती मांगी थी। जब पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल खंगाली तो उसमें वो नंबर मिल गया। इसके बाद जहां संजीत काम करता था, वहां पूछताछ की और कुलदीप व ईशू के बारे में सुराग मिल गया। यहीं से पुलिस को लीड मिल गई। सबसे पहले पुलिस ने दबौली निवासी ईशू को पकड़ा था।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
पूछताछ में परत दर परत खुलनें लगीं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस नंबर से फिरौती की कॉल बदमाश कर रहे थे, उससे एक दो कॉल संजीत के दोस्त हिमांशु को भी कीं। कुलदीप ने हिमांशु से संजीत के बारे जानकारी ली थी। जब बर्रा थाने की नई टीम ने तहकीकात की तो फिरौती वाले नंबर की सीडीआर खंगाली।
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जानकारी देती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इसमें हिमांशु का नंबर मिला। पुलिस ने हिमांशु से संपर्क किया। तब हिमांशु ने बताया कि इस नंबर से कुलदीप और ईशू ने बातचीत की थी। वे लोग संजीत के लापता होने का जिक्र करके पूछ रहे थे मिला कि नहीं मिला। हिमांशु ने बताया कि कुलदीप लगातार संजीत के बारे में उससे पूछताछ रहता है।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
इतना सुराग बहुत था। पुलिस तुरंत कुलदीप के पीछे लग गई। वह फरार हो गया तो पुलिस संजीत के एक अन्य दोस्त के माध्यम से ईशू तक जा पहुंची। ईशू ने तुरंत वारदात कबूल कर ली। फिर एक-एक कर पुलिस ने सभी को दबोचा और खुलासा हुआ।
काश पहले कर लेते यही काम
जब बर्रा में इंस्पेक्टर रणजीत राय थे तब मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अगर यही काम उस वक्त हो जाता और संजीत के दोस्तों से पूछताछ होती तो पहले ही घटना खुल गई होती।