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औरैया: कभी साए की तरह कमलेश के साथ रहते थे मंजुल, सियासी महत्वकांक्षाओं ने बनाई थी दोनों में दूरी

Mon, 16 Mar 2020 11:11 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
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औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत - फोटो : अमर उजाला
औरैया जिले में एमएलसी कमलेश पाठक और हत्या का शिकार अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच कभी बहुत ही घनिष्ठ संबंध हुआ करते थे। हर वक्त दोनों को साथ देखकर कोई मंजुल को कमलेश पाठक की परछाई कहता था तो कोई अंगरक्षक। पुराने लोग बताते हैं कि अधिवक्ता मंजुल चौबे जिस वक्त औरैया के तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए तब भी कमलेश पाठक उनके साथ थे।
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औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत - फोटो : अमर उजाला
नगर पालिका के चुनाव 2006 में भी मंजुल ने दावेदारी करने का मन बनाया था, लेकिन इसमें कमलेश पाठक से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला था। यहां से दोनों के बीच दूरियां बनने लगी थीं। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब हो गए। उनकी भाजपा से नजदीकी ने कमलेश पाठक से दूरी को धीरे-धीरे वर्चस्व की जंग में तब्दील कर दिया। पुराने सपाई होने के कारण कमलेश पाठक सत्ता परिवर्तन के बाद भी इलाके में सपा की धमक बनाए रखना चाहते थे। इसको लेकर दोनों के समर्थकों में अक्सर तनातनी होती रहती थी। इस तनातनी का अंत ऐसे होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
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औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत - फोटो : अमर उजाला
सन 85 में सबसे कम उम्र विधायक का दर्जा मिला था कमलेश को
शुरुआत से समाजवादी पार्टी को समर्पित कमलेश पाठक 1985 में सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। उस समय 28 वर्ष की उम्र होने के कारण उन्हें यूपी में सबसे कम उम्र के विधायक का खिताब दिया गया था। वर्ष 1990 में विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में पहली बार राज्यमंत्री का दर्जा मिला था।

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औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2002 में वह डेरापुर से विधायक चुने गए थे। हमेशा सपा मुखिया मुलायम सिंह के नजदीकी माने जाने वाले कमलेश पाठक ने जिला बचाओ आंदोलन के दौरान सपा का रुख स्पष्ट न होने पर हल्के से बागी तेवर दिखाए थे, हालांकि इससे उनकी सपा से स्थायी दूरी नहीं बनी। वर्ष 2007 में वह दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े मगर हार गए थे। 
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औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत - फोटो : अमर उजाला
बसपा शासन में औरैया में इंजीनियर की हत्या हुई थी। दिबियापुर विधायक एवं बसपा नेता शेखर तिवारी समेत कुछ अन्य पर हत्या का आरोप लगने पर कमलेश पाठक ने शेखर तिवारी के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। उस दौरान उन्हें जेल भेजा गया था। कई केस दर्ज हुए थे। जेल में रहकर उन्होंने 2009 में अकबरपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा, मगर हार गए थे। 2012 में सिकंदरा से विधानसभा का चुनाव लड़े और इस बार भी हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2013 में रेशम विभाग के अध्यक्ष (राज्यमंत्री का दर्जा) का जिम्मा संभाला था। जून 2016 में समाजवादी पार्टी से फिर एमएलसी चुने गए थे।
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