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साध्वी निरंजन ज्योति के गरीबी के वो दिन जो लोगों के लिए बन गए प्रेरणा के स्रोत

Fri, 31 May 2019 02:58 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
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साध्वी निरंजन ज्योति(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
राजनीति और धर्म-अध्यात्म में शिखर तक पहुंची साध्वी निरंजन ज्योति का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। यह बताने में गुरेज नहीं करती हैं कि वह बचपन में पिता के साथ काम के बदले अनाज योजना में पत्योरा पंप कैनाल की खोदाई करने जाती थीं। मजदूरों के साथ फावड़ा भी चलाती थीं।
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साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
हमीरपुर जिले के पत्योरा गांव में वर्ष 1967 में साध्वी निरंजन ज्योति का जन्म हुआ था। घर में पिता स्व. शिव प्रसाद और माता शिवकली के साथ वह भी पूजा-पाठ करती थीं। साथ ही हवन पूजन में उनका मन लगता था। कठिनाई भरे रास्ते पर चलकर साध्वी न सिर्फ केंद्रीय राज्यमंत्री बनीं बल्कि निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपाधि भी हासिल की। जनवरी 1982 में साध्वी ने घर छोड़नेे का निर्णय लिया।
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केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
इसके बाद वह स्वामी अच्युतानंद जी के संपर्क में आई। साध्वी ने स्वामी के मूसानगर कानपुर देहात के आश्रम में रहकर योग और वेदांत की शिक्षा ली। इसके बाद हरिद्वार में स्वामी परमानंद जी के सानिध्य में गीता उपनिषद, ब्रह्म सूत्र का अध्ययन किया। वर्ष 1984 में अयोध्या में राम मंदिर का ताला खोलने के लिए आंदोलन शुरू हो चुका था।

 

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पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
इस दौरान मुस्लिम नेता सहाबुद्दीन ने राम जन्म भूमि में नमाज अदा करने का एलान कर दिया। साध्वी ने 1988 में विहिप से जुड़कर हरिद्वार से अयोध्या तक मार्च किया। स्वामी परमानंद जी महाराज के नेतृत्व में गंगा को घाटों में लाने का अभियान चलाया। 1993 में गुरु अच्युतानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद उन्होंने स्वामी परमानंद जी महाराज के सानिध्य में विहिप के कार्यक्रमों प्रतिभाग करना शुरू किया।

 
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साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
वर्ष 2002 में पहली बार हमीरपुर से भाजपा से टिकट लेकर साध्वी चुनाव लड़ीं, लेकिन पांच हजार वोटों से हार गईं। 2007 में दोबारा विधायक पद के चुनाव मैदान में उतरीं, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। 2012 में फिर चुनाव लड़ीं और जीतीं।
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साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
इसके बाद 2014 में पार्टी में इनका कद बढ़ा तो फतेहपुर लोकसभा का चुनाव जीत गईं। केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण राज्य मंत्री बनकर जनता की सेवा की। जनवरी माह में कुंभ मेला में साध्वी को निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपलब्धि भी मिली। वर्ष 2019 में फतेहपुर लोकसभा संसदीय सीट से चुनाव में रिकॉर्ड वोट पाकर इन्होंने अपना ही 2014 का रिकार्ड तोड़ दिया।
 
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कथा सुनाती केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
नाम- साध्वी निरंजन ज्योति
जन्म - वर्ष 1967
गांव - हमीरपुर जिले का पत्योरा गांव
पिता- स्व. शिव प्रसाद
माता- स्व. शिवकली
बड़े भाई- स्व. राम औतार
छोटे भाई - रमेश और राजेंद्र
 
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साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
- जनवरी 1982 में साध्वी स्वामी अच्युतानंद के संपर्क में आई।
- वर्ष 1984 में अयोध्या में राम मंदिर का ताला खोलने के लिए आंदोलन शुरू किया।
- वर्ष 1988 में विहिप से जुड़कर राजनीति शुरू की।
- वर्ष 1993 में गुरु अच्युतानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद स्वामी परमानंद जी महाराज के सानिध्य में आईं।
- वर्ष 2002 में पहली बार हमीरपुर से भाजपा से विधायक का चुनाव लड़ीं। जीत नहीं सकीं।
- 2007 में पुन: विधायक का चुनाव लड़ीं, जीत नहीं सकीं।
- 2012 में पुन: विधायक का चुनाव लड़ी और जीतीं।
- 2014 में फतेहपुर से सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री बनीं।
- जनवरी 2019 में प्रयागराज महाकुंभ में साध्वी को निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपलब्धि मिली।
- सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के लिए फतेहपुर से चुनाव लड़ीं। रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीत का भाजपा का परचम लहराया।
 
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