कानपुर में हादसे का शिकार हुई साबरती एक्सप्रेस की जांच को गठित एसआईटी ने सोमवार से जांच तेज कर दी। विवेचक पनकी थाना प्रभारी मानवेंद्र सिंह ने ट्रेन के चालक, परिचालक और गार्ड को बयान व पूछताछ के लिए बुलाया है। यह तीनों ही पूरे मामले के चश्मदीद है। इन्हें बयानों के लिए बुलाने के लिए बाकायदा सफीना नोटिस भी विवेचक ने भेजा है। इसके बाद यात्रियों को भी एसआईटी बयान दर्ज करने के लिए तलब करेगी। वहीं हादसे के दौरान साबरमती एक्सप्रेस पलटने की वजह तलाशने के लिए लखनऊ की फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है।
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Sabarmati Express Derail
- फोटो : amar ujala
साबरमती एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में पनकी थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई है। इसकी विवेचना पनकी थाना प्रभारी कर रहे हैं। रविवार रात डीसीपी पश्चिमी राजेश कुमार सिंह ने मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जो विवेचक की विवेचना में मदद करेगी। सोमवार को एसआईटी ने जांच तेज कर दी।
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डीसीपी पश्चिम ने घटनास्थल की स्थानीय फॉरेसिक टीम जांच कर चुकी है। मौके पर मिली रेल पटरी का टुकड़ा व अन्य साक्ष्य रेलवे अफसरों को जांच के लिए सौंपे जा चुके हैं। अब लखनऊ की फॉरेंसिक टीम को पत्र लिखा गया है, जिसमें जल्द ही सीन रिक्रिएट कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। क्राइम ब्रांच भी अपने स्तर से जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच के एक अफसर ने भी टीम के साथ घटनास्थल का जायजा लिया है।
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ट्रैक, व्हील और वैगन व कैरिज विभाग को जांच में किया शामिल
एसआईटी ने ट्रैक, व्हील और वैगन व कैरिज विभाग के लोगों से जांच शुरू कर दी है। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग और सीनियर लोको पॉयलट से इस बात की जानकारी की जा रही है कि कितनी दूरी से ब्रेक लगाया जाए, तो कितनी दूरी पर ब्रेक लगेगा। रेलवे ट्रैक पर मिले स्किडिंग साइन और क्षतिग्रस्त कोच के व्हील स्किडिंग रिपोर्ट भी मांगी गई है। घटनास्थल से टीम ने गिट्टी का पाउडर भी एकत्र किया गया है।
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पटरी का टुकड़ा ट्रैक तक कैसे पहुंचा?, इसका जवाब खोल सकता है हादसे का राज
साबरमती एक्सप्रेस के डिरेल होने के मामले में रेलवे के स्थानीय अधिकारियों के साथ ही अब सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (एसएजी) अफसरों की पांच सदस्यीय कमेटी ने भी तहकीकात शुरू कर दी है। टीम में शामिल अधिकारी मंगलवार को मौका मुआयना कर सकते हैं। प्रारंभिक जांच में पूरा जोर पटरी के टुकड़े और ट्रैक के संपर्क पर है। समझने का प्रयास किया जाएगा कि आखिर पटरी किस तरह से रखी थी, जो ट्रेन का कैटल गार्ड तक टूट गया।
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एसएजी के चेयरमैन प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफिसर हैं, जबकि टीम में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल के वरिष्ठ अधिकारी और आरपीएफ के डीआईजी को शामिल किया गया है। यह टीम विभिन्न पहलुओं को परखने के बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी। वहीं, एसएजी के सदस्यों ने रविवार और सोमवार को अपने-अपने विभागों से रिपोर्ट लेकर उसका अध्ययन किया।
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जांच कर रही टीमें तलाश रहीं इन सवालों के जवाब
आखिर पटरी का टुकड़ा ट्रैक तक कैसे पहुंचा?
टुकड़े को क्या ट्रैक पर क्लैंप से बांधा गया था?
करीब 120 टन वजनी इंजन के दोनों कैटल गार्ड कैसे टूटे गए?
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कॉशन लेकर गुजारी गईं झांसी रूट की ट्रेनें
साबरमती एक्सप्रेस के हादसे वाले ट्रैक को सही करा दिया गया है। यहां पर कॉशन लेकर ट्रेनों का गुजारा जा रहा है। सोमवार को झांसी की ओर जाने वाली ट्रेनें 10 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गईं। यहां पर ब्लॉक लेकर नए सिरे से ट्रैक तैयार किया जाएगा। करीब एक किलोमीटर तक नई लाइन बिछाई जाएगी। ब्लॉक लेने का निर्णय मंडल की ओर से किया जाएगा। हालांकि रेलवे के इंजीनियर और ट्रैक कर्मी जुटे हुए हैं। ट्रैक किनारे रखी ट्रेन की दस बोगियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ तैनात है।
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घटनास्थल से पांच किमी तक का मोबाइल डाटा डंप
उधर, कानपुर-झांसी रूट पर पनकी में साबरमती एक्सप्रेस के डिरेल होने की घटना की जांच एंटी टेररिस्ट स्क्वॉएड (एटीएस) ने भी तेज कर दी है। हादसे की तह तक पहुंचने के लिए घटनास्थल के पांच किलोमीटर के दायरे का मोबाइल डंप डाटा और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने में जुट गई है।
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एटीएस यह साफ करना चाहती है कि हादसे के पीछे रेलवे की चूक है या कोई साजिश। साथ ही देशभर में हुई घटनाओं में किसी एक ही पैटर्न का इस्तेमाल तो नहीं किया गया, यह भी देखा जाएगा। एटीएस ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मौके से मिली पटरी और अन्य साक्ष्यों की जांच की।
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टीम ने घटनास्थल के आसपास के गांवों में घूमकर लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि रेल हादसे के दौरान किसी ने कुछ संदिग्ध देखा तो नहीं। स्थानीय पुलिस और रेलवे के कुछ लोगों से भी टीम ने बातचीत की है। सूत्रों के मुताबिक डंप डाटा और सीसीटीवी फुटेज खंगालने से जांच एजेंसी को घटना को समझने में मदद मिलेगी।
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बोल्डर से 120 टन वजनी ट्रेन का कैटल गार्ड भी टूटा
प्रारंभिक जांच में पूरा जोर पटरी के टुकड़े और ट्रैक के संपर्क पर है। समझने का प्रयास किया जाएगा कि आखिर पटरी किस तरह से रखी थी, जो ट्रेन का कैटल गार्ड तक टूट गया। एसएजी के चेयरमैन प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफिसर हैं।
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अपने-अपने विभागों से रिपोर्ट लेकर किया जाएगा अध्ययन
वहीं, टीम में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल के वरिष्ठ अधिकारी और आरपीएफ के डीआईजी को शामिल किया गया है। यह टीम विभिन्न पहलुओं को परखने के बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी। वहीं, एसएजी के सदस्यों ने रविवार और सोमवार को अपने-अपने विभागों से रिपोर्ट लेकर उसका अध्ययन किया।
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ये थी पूरी घटना
वाराणसी से अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस (19168) शुक्रवार देर रात करीब 2:30 बजे बोल्डर से टकराकर पटरी से उतर गई। यह घटना गोविंदपुरी और भीमसेन स्टेशन के बीच पनकी क्षेत्र में हुई। राहत की बात यह रही कि सभी 22 बोगियों के डिरेल होने के बाद भी कोई हताहत नहीं हुआ। कुछ यात्रियों को मामूली चोट आई है। वहीं हादसे की वजह से करीब पांच घंटे तक ट्रैक बाधित रहा।
साजिश की आशंका, जांच शुरू
इसके बाद धीमी गति से ट्रेनों को डाउन लाइन से गुजारा गया। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), आरपीएफ और रेलवे की एसएजी (सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) टीम ने जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर पटरी का एक हिस्सा भी मिला है, जिससे किसी साजिश से इन्कार नहीं किया जा सकता है। साबरमती एक्सप्रेस सेंट्रल स्टेशन से रवाना हुई। यह गोविंदपुरी स्टेशन से होते भीमसेन स्टेशन की ओर जा रही थी।