फर्रुखाबाद जिले में कटरी क्षेत्र के 12 गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। कटरी धर्मपुर गंगा किनारे से करीब आठ किमी दूर शहर से सटे गांव हैवतपुर गढ़िया के खेत जलमग्न हो गए। मुख्यमार्ग पर पांच-छह स्थानों पर सड़क से ऊपर पानी तेजी से बह रहा है। फसलें बाढ़ में समा चुकी हैं। आठ दिन से लोगों के घरों में चूल्हा भी नहीं जल पा रहा है।
बाढ़ से परेशान लोगों का रिश्तेदारों के यहां पलायन शुरू हो गया है। गंगा में आठ दिन से लगातार बढ़ रहा पानी बढ़पुर ब्लाक के गुलड़िया, पहाड़पुर, हुल्ला की मड़ैया, छोटी गुलड़िया, वीर सहाय की मड़ैया, कटरी धर्मपुर, शिकारपुर, पंखिया नगला, बिलावलपुर समेत 12 गांवों में दो से चार-चार फीट पानी भरा हुआ है।
तेजी से बढ़ रहा बाढ़ का पानी बिलावलपुर और हैवतपुर गढ़िया के पास चार स्थानों पर सड़क के दूसरी तरफ गिर रहा है। हैवतपुर गढ़िया में पूर्व दिशा के मकानों के पास पानी भरकर पश्चिम की तरफ सड़क से गिरने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का बहाव तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार सुबह तक पूरा क्षेत्र पानी से लबालब हो जाएगा। हालात ऐसे हैं कि जिधर देखो, उधर, पानी ही पानी नजर आ रहा है।
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घरों में भरा बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
बाढ़ से बिजली आपूर्ति भी ठप
एक तरफ बाढ़ और दूसरी तरफ बिजली कटने से गांवों में शाम होते ही घुप अंधेरा हो जाता है। राशन दुकानों पर केरोसिन बंद कर दिया गया है और बाढ़ के चलते बिजली खंभों और ट्रांसफार्मरों के चारों ओर जलभराव होने से बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। ऐसे में लोग रात के अंधेरे में भगवान के भरोसे ही समय काट रहे हैं।
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घरों में भरा बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
दो दिन से नहीं जला चूल्हा
गंगा की बाढ़ में समा चुके पहाड़पुर गांव के विजेंद्र शहर से त्रिपाल लेकर गांव की ओर जा रहे थे। कटरी धर्मपुर से पहले नाले में अथाह जल होने की वजह से नाव का इंतजार कर रहे थे। बोले, दो दिन से चूल्हा नहीं जला। अब त्रिपाल लेकर जा रहा हूं। छत पर डालकर रोटी की जुगाड़ करवाऊंगा। प्रशासन सुध लेने नहीं आया।
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घरों में भरा बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
झोपड़ियां जमींदोज, कमरों में घुसा पानी
कटरी धर्मपुर के मजरा पंखिया नगला निवासी अकील बोले, गांव में 400 मकान हैं। आठ दिन से पूरे गांव में पानी भरा है। रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं। रात में पूरा गांव टापू हो जाता। लोग भूख से परेशान हैं। अभी तक प्रशासन ने सुध नहीं ली है। जानवरों के लिए भी खाने को कुछ भी नहीं है।
बच्चों को समझाना हो रहा मुश्किल
पंखिया नगला की हुस्नबानो पांच दिन बाद शहर में सब्जी, दालें लेने आई थीं। बोलीं, सामान छत पर रख लिया है। मकानों में पानी भरा है। बच्चों को कैसे समझाया जाए। हम लोग परेशान हैं। अधिकारियों को चाहिए कि खाद्य सामग्री उपलब्ध करवा दें।