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सोशल मीडिया से इस तरह 'रिश्तों में लग रही है दीमक', ये केस पढ़कर ले सकते हैं सबक

Mon, 18 Jun 2018 08:21 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

break up due to social media
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डेमाे पिक
कई केस ऐसे हैं जिनमें सोशल मीडिया ने रिश्ते तोड़ने में भूमिका निभाई है। जरा-जरा सी बात पर रिश्ते टूटने की कगार पर आना आम हो गया है। वजह यह है कि किसी को सास-ससुर के साथ रहना पसंद नहीं है तो कहीं बढ़ती अपेक्षाओं से रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। फेसबुक और व्हाट्स एप भी दिक्कत पैदा कर रहे हैं।  एेसे ही कुछ मामलों से आज आपको परिचित कराते हैं। 

 
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डेमाे पिक
केस-1
शहर के नामी बिजनेसमैन ने 2017 में अपनी बेटी की शादी एक इंजीनियर के साथ की थी। हाईप्रोफाइल शादी में लाखों रुपये खर्च हुए। कुुुछ समय तक तो सब ठीक था। करीब आठ महीने बाद बेटी की फेसबुक की कुछ पुरानी फोटो जिसमें वह अपने दोस्तों के साथ थी, पति ने देख ली। पूछने पर जो जवाब मिला उससे पति और परिवार के लोग संतुष्ट नहीं थे। बात बढ़ी और नौबत तलाक तक आ गई। उनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
 
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डेमाे पिक
केस-2
युवक दिल्ली में जॉब करता है, परिवार कानपुर में रहता है। नवंबर 2017 में इंजीनियर लड़की से शादी हुई। लड़की ने सास-ससुर के साथ रहने से इंकार कर दिया। काफी बहस, लड़ाई के बाद आखिरकार लड़की दिल्ली गई। जॉब करने के लिए पति पर दबाव बनाया। पति ने उसमें भी हामी भर दी। पत्नी जॉब करने लगी। वह कब आती, कब जाती, कितनी सैलरी मिलती, इसके बारे में पति को नहीं बताया। पति ने पूछा तो विवाद हुआ। विवाद काफी बढ़ा और मामला काउंसलर के पास आया। पति-पत्नी अब अलग रह रहें हैं। पति ने नौकरी छोड़ दी है, वह डिप्रेशन में हैं।

 

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डेमाे पिक
केस-3
सरकारी नौकरी से रिटायर बुजुर्ग (73) की पत्नी ने पति के साथ रहने से इंकार कर दिया। इस पर बच्चों ने घर के बगल में ही मां को घर दिलवा दिया। इसकी वजह यह थी कि मां उनकी देखभाल करते रहे, वहीं पिता की को भी अपनी गलती का एहसास हो सके। एक दिन सुबह मां खाना देने पहुंची तो दोनों के बीच विवाद हुआ। बुजुर्ग ने पत्नी को पीट दिया। इस पर वह आशा ज्योति केंद्र पहुंची और पति से अलग रहने की अर्जी दे दी। काफी काउंसलिंग के बाद तय हुआ कि दोनों अलग-अलग ही रहेंगे।

 
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डेमाे पिक
ये तीन केस तो मात्र बानगी भर हैं। जरा-जरा सी बात पर रिश्ते टूटने की कगार पर आना आम हो गया है। वजह यह है कि किसी को सास-ससुर के साथ रहना पसंद नहीं है तो कहीं बढ़ती अपेक्षाओं से रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। फेसबुक और व्हाट्स एप भी दिक्कत पैदा कर रहे हैं। कहीं पति का फेसबुक पर ज्यादा रहना अखरता है तो कहीं पर पत्नी के व्हाट्स एप पर व्यस्त रहने से झगड़े हो रहे हैं। हालात यह हैं कि आपकी सखी आशा ज्योति केंद्र में तीन सालों में पति-पत्नी के बीच झगड़ों के केस में तेजी से इजाफा हुआ है।

 
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डेमाे पिक
लड़कियों का स्वावलंबी होना बड़ा कारण है। लड़कियां अब दबकर नहीं रहना चाहतीं। इसके अलावा सोशल मीडिया ने लोगों को तोड़ने का काम भी किया है। कई केस ऐसे हैं जिनमें सोशल मीडिया ने रिश्ते तोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
अर्पिता सिंह, काउंसलर आपकी सखी आशा ज्योति केंद्र

 
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केसों की संख्या में तेजी से हुआ इजाफा
आपकी सखी आशा ज्योति केंद्र में साल-दर-साल केसों की संख्या में इजाफा हुआ है। तीन साल में केसों की संख्या पांच गुनी हो गई है। 2015 में जहां 300 केस आते थे, 2016 में 800 केस,  2017 में 1400 केस और 2018 (मई तक) 350 केस आ चुके हैं। केंद्र की प्रभारी अंकिता निगम कहती है कि कुछ मुद्दे तो बेहद गंभीर होते हैं, लेकिन कई बार छोटी छोटी बातों पर अनबन देखने को मिलती है। काउंसलिंग के बाद लोग साथ रहने को तैयार हो जाते हैं। अंकिता कहती हैं कि महिलाएं जागरूक हो गईं हैं। 


 
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डेमाे पिक
रिश्ते टूटने का मुख्य कारण
सोशल मीडिया एक बड़ा कारण है। कभी पति पत्नी की पुरानी अपलोड फोटो देखने के बाद लड़ता है तो कभी पत्नी पति के साथ फोटो अपलोड न करने पर लड़ती है।
-मायके की दखलंदाजी से कभी-कभी न चाहते हुए भी बातों का तिल का ताड़ बन जाता है।
-समाज में बदलाव: तलाक शब्द समाज ने अब सहजता से स्वीकार कर लिया है। तलाकशुदा होना अब शर्म का कारण नहीं माना जाता।
-स्वावलंबिता: लड़कियां अब पति की कमाई पर निर्भर नहीं हैं। साथ ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं।
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