जगद्गुरु रामानंदाचार्य तुलसीपीठाध्वीश्वर स्वामी श्रीरामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि जब मनी व्हाइट होगी तब मन भी व्हाइट होगा। तभी बच्चों को और भारत की युवा पीढ़ी को संस्कार भी अच्छे मिलेंगे। पापी मनुष्य का अन्न भी नहीं खाना चाहिए और न ही लूट खसोट का धन खाना चाहिए। यदि आप ऐसा करेंगे तो जीवन में कभी सुख और शांति नहीं मिलेगी।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य
रामाभिराम सेवा संस्थान की ओर से कानपुर के बड़ा सेंट्रल पार्क में चल रही श्रीरामकथा में श्रीरामभद्राचार्य ने कहा कि पितरों का श्राद्ध सदैव श्रद्धा से करना चाहिए। वैसे भी जिस कार्य में श्रद्धा नहीं होती है वह कार्य कभी सफल नहीं होता है। वह चाहे भगवान की पूजा हो या फिर नौकरी-व्यापार। सभी के लिए श्रद्धा अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जो अपने कर्त्तव्य का पालन करेगा वह कभी दुखी नहीं हो सकता। कर्त्तव्य विस्मरण है दुख, कर्त्तव्य स्मरण है सुख। भीष्म को कर्त्तव्य विस्मरण हुआ और दुर्योधन का साथ दिया। द्रोपदी के करुण कंदन में वह कर्त्तव्य की आवाज नहीं सुन पाए।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य
महाकाव्य रघुवंश के अनुसार सीताजी कहती हैं रावण से वही महिला सर्वश्रेष्ठ है जो ससुराल की मर्यादा को आंच नहीं आने देती। जटायुजी रघुकुल तिलक की नारी को पहचान गए परंतु भीष्म पितामह कुरुकुल तिलक की नारी को नहीं पहचान पाए। भगवान कृष्ण कह रहे हैं जो गलत है उसका विरोध होना ही चाहिए। सिंह की गर्जना सार्वजनिक होती है। जो सार्वजनिक रूप से गलत का विरोध कर सके वहीं सिंह है। उसी को धर्म सिंह के सिंहासन पर बैठाना चाहिए।
प्रसंगवश उन्होंने कहा कि उन्नाव के पास गांव है बदरका। जहां चंद्रशेखर आजाद का जन्म हुआ सीताराम तिवारी के घर में। आजाद जानते थे कि अंग्रेजों को अकेले न हरा पाएंगे पर वह जब तक जीवित रहे तब तक अपने राष्ट्र के लिए प्राणपर्यंत प्रयास किया। जटायु की भी यही परिस्थिति है। इस मौके पर संयोजक पूर्व विधायक अजय कपूर, अमित झा, भक्ति विजय शुक्ला, टिल्लू सिंह आदि मौजूद रहे।