कानपुर एल्गिन मिल की संपत्तियां सोमवार को हंगामे और नोकझोंक के बीच अवैध कब्जेदारों से मुक्ति कराई गईं। पुलिस-प्रशासनिक अफसरों और भारी फोर्स की मौजूदगी में 108 आवास खाली कराकर लिक्विडेटर का ताला लगवा दिया गया। करीब 60 झोपड़ियां ढहा दी गईं। रविवार को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने खलासी लाइन स्थित मैक्सवेल सेटलमेंट कंपाउंड, सिविल लाइंस स्थित एल्गिन मिल लोअर कंपाउंड और सेटलमेंट परिसर में जाकर कब्जेदारों को परिसर खाली करने के निर्देश दिए थे।
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एल्गिन मिल की संपत्तियां
- फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद तमाम परिवार वहीं डटे रहे। सोमवार की सुबह एसीएम-पांच प्रेम नारायण सिंह, सीओ कर्नलगंज और कई थानों की फोर्स और पीएसी के साथ पहले सिविल लाइंस स्थित सेटलमेंट कंपाउंड पहुंचे। कब्जेदारों को एक घंटे के भीतर परिसर खाली करने के निर्देश दिए।
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इस पर लोगों ने अपनी गृहस्थी का सामान समेट लिया और देखते ही देखते परिसर में सभी आवास खाली हो गए। इसके बाद अफसर फोर्स के साथ लोअर कंपाउंड पहुंचे। वहां सात बंगले खाली कराए। करीब 60 झोपड़ियां खाली कराने की बारी आई तो महिलाएं भड़क गईं। बोलीं, हम गरीब हैं, कहां जाएं। किराये पर कोई मकान भी नहीं दे रहा है।
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कुछ दिन की मोहलत नहीं दे सकते तो साहब गंगा में कूदने का आदेश दे दो। इस पर एक घंटे की मोहलत मिलने पर महिलाओं ने झोपड़ियों से गृहस्थी का सामान निकाला। इसके बाद झोपड़ियों को जेसीबी से गिरवा दिया गया। टीम के खलासी लाइन स्थित मैक्सवेल सेटलमेंट कंपाउंड पहुंचने पर महिलाओं ने अफसरों को खरी-खोटी सुनाई।
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आखिर में हंगामे के बीच कंपाउंड को खाली करवा लिया गया। एसीएम के मुताबिक तीनों परिसरों में बने 108 आवास कब्जेदारों से मुक्ति कराए गए हैं। मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित सेटलमेंट कंपाउंड के बचे आवासों को भी खाली कराया जाएगा।
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जिला प्रशासन को एल्गिन मिल की संपत्तियां खाली कराकर पांच दिसंबर तक हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करना है। अपने आशियानें खाली करते वक्त बच्चों से लेकर बड़ों की आंखों में आंसू थे। लोअर कंपाउंड में झोपड़ी बना रहने वाली मायावती ने बताया कि वह घरों में साफ-सफाई करके परिवार का पेट पालती हूं।
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वह दुहाई दे रही थी कि अब वह दो बेटियों और एक बेटे को लेकर रहने कहां जाए। झोपड़ी को गिरता देखकर जैमुलनिशां (90) फफक कर रो पड़ी। वहीं, आठ साल का ईदुल परमट चौकी प्रभारी संतोष ओझा के पैरों पर गिर गया। वह बोला, साहब घर न गिराओ, यहां से चले जाओ। हम बहुत गरीब हैं, कहां जाएंगे। चौकी प्रभारी बच्चे को उठाया और समझा-बुझाकर शांत कराया।
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एल्गिन मिल सेटलमेंट कंपाउंड में सन 1929 में एल्गिन मिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खुला था। यहां पढ़ने वाले कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च मिल प्रबंधन ही उठाता था। वर्ष 2011 में विद्यालय बंद करने की मिल प्रबंधन की घोषणा पर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिए। विद्यालय में एक से 10वीं कक्षा तक 64 बच्चे हैं। हालांकि चार शिक्षक, एक लिपिक व चपरासी को 49 महीने से वेतन नहीं मिला रहा है।
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शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में कैंपस और कटरी के बच्चे पढ़ने आते थे। कैंपस खाली होने के बाद अगर बच्चे नहीं आए तो विद्यालय खुद ब खुद बंद हो जाएगा।
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ये मौजूद रहे
दस थाना प्रभारी, 30 सबइंस्पेक्टर, छह महिला सबइंस्पेक्टर, 100 सिपाही, 20 महिला सिपाही, दो कंपनी पीएसी, सीओ कर्नलगंज, एसीएम-पांच।
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गंगा के तट पर तैनात रहा फोर्स
मकान खाली कराए जाने की कार्रवाई के दौरान गंगा नदी में महिलाओं के कूदने की धमकी से अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। अफसरों ने फौरन गंगा नदी के तट पर पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों को लगाया।
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एल्गिन की 12 संपत्तियों में से आठ राज्य सरकार की रहीं, लेकिन बैंक और बीआईसी लड़ते रहे। जिला प्रशासन ने भी अपनी पुरानी जमीनों का हाल नहीं देखा। इसलिए करोड़ों का नुकसान होता रहा। वरना किराये पर ही उठाने से इतने साल में जिला प्रशासन को करोड़ों का राजस्व मिलता।
बीआईसी ने तथ्य छिपाकर बैंक से कर्ज लिया। बैंक को यह नहीं बताया गया कि एल्गिन मिल की संपत्तियां पट्टे की हैं। यह भी आशंका है कि बैंक को जानकारी रही लेकिन अफसर जानबूझकर चुप्पी साधे रहे। कर्ज न चुकाने पर 2014 में बैंक ने कर्ज वसूलने के लिए एल्गिन मिल की संपत्तियों की नीलामी की गुहार हाईकोर्ट में लगाई। नजूल की जमीन होने के बावजूद इसमें जिला प्रशासन को पार्टी नहीं बनाया गया। मुकदमे की सुनवाई कर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से परिसर खाली कराकर रिपोर्ट देने को कहा तो खुलासा हुआ कि आठ संपत्तियां नजूल की हैं। एडीएम फाइनेंस का कहना है कि यह तथ्य सामने आने के बाद ही जिला प्रशासन मामले में पक्षकार बन रहा है।