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यूट्यूब पर सोए हुए को जगा रही 'गालिब हवालात में' और 'कंबल वाले भाई'

Wed, 10 Jan 2018 01:53 PM IST
ऐश्वर्या द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
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कवि गौरव त्रिपाठी
इन दिनों यू-ट्यूब पर गौरव त्रिपाठी की कविताओं ने धमाल मचा रखा है। 'गालिब हवालात में', 'कंबल वाले भाई', 'श्री राम अदालत में...' गौरव की लिखी तीनों कविताएं यू-ट्यूब पर खूब सुनी और देखी जा रही हैं। वैसे तो इसके पहले भी गौरव की कई रचनाएं सोशल मीडिया पर वायरल हुईं हैं लेकिन इन तीन कविताओं से उन्हें खास पहचान मिली है। कानपुर, किदवई नगर के रहने वाले गौरव ने हाल ही में मथुरा में हुए 'ब्रज लिटरेचर फेस्टिवल' में अपनी कविताएं सुनाई थीं। इसके अलावा देशभर में होने वाले ओपन माइक (कोई भी प्रस्तुति दे सकता) कार्यक्रम में भी भाग लेते रहते हैं।
 

 
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जब गौरव के साथ-साथ ऑडियंस सुनाने लगी कविता

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कवि गौरव त्रिपाठी
‘गालिब है हवालात में, प्रेमचंद्र के साथ में। मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ है, हथकड़ियां हैं हाथ में।’ गौरव की लिखी यह कविता एक ही दिन में यू-ट्यूब पर ट्रेंड करने लगी थी। हालांकि गौरव को इस बात की खबर नहीं थी। वे आईआईटी कानपुर में अंतराग्नि में अपना शो करने आए थे। गौरव ने जब कविता (गालिब है हवालात में...) सुनानी शुरू की तो सामने मौजूद ऑडियंस भी एक स्वर में यह कविता बोलने लगी। तब गौरव को पता चला कि एक दिन पहले यू-ट्यूब पर डाली गई उनकी कविता कितनी तेजी से ट्रेंड कर रही है। इस कविता को चार लाख से ज्यादा लोग सुन चुके हैं।
 

 
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बाबा की कविताओं ने बनाया लेखक

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कवि गौरव त्रिपाठी
गौरव बताते हैं कि कुछ साल वो फौज में भी रहे हैं। वर्तमान में वो लेखक हैं और कविताओं के अलावा कई कारपोरेट फिल्म और विज्ञापन की स्क्रिप्ट भी लिखते हैं। गौरव बताते हैं कि बचपन में उनकी दादी, बाबा की लिखी हुई कविताएं सुनाती थीं। तभी से उनके अंदर लिखने की दिलचस्पी पैदा हुई। गौरव अपने बाबा और दुष्यंत कुमार को प्रेरणास्रोत मानते हैं।

 

पास में रखते हैं डायरी

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कवि गौरव त्रिपाठी
गौरव बताते हैं कि हर समय वे अपने पास एक डायरी रखते हैं। दिन हो या रात जब कभी भी उनके दिमाग में कोई रोचक लाइनें आती हैं, उसे तुरंत लिख लेते हैं। गौरव ने कहा कि जिन युवाओं को लिखने का शौक है, इस बात का ख्याल रखें कि वे किसी को कॉपी न करें। आत्मविश्वास के साथ खुद से कुछ लिखें और सोशल मीडिया से लोगों तक पहुंचाएं। गौरव इन दिनों मुंबई में रहते हैं। लेकिन हर त्योहार कानपुर में ही आकर मनाते हैं। 


 
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गौरव त्रिपाठी का प्रोफाइल

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कवि गौरव त्रिपाठी
नाम : गौरव त्रिपाठी
निवास : किदवई नगर, कानपुर
पिता का नाम : स्व. ओम शरण त्रिपाठी
माता का नाम : विजयकांति त्रिपाठी
 
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कविताएं और उन्हें मिले व्यूज

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कवि गौरव त्रिपाठी
जो बहा था खून उसके दूर तक छींटे गए, कल अदालत में पुन: श्रीराम घसीटे गए। जज ने बोला हे प्रभु, हमको क्षमा है चाहिए, आप नामजद हुए हैं कठघरे में आइए।।
इसे 10 लाख लोगों ने देखा है।

गालिब है हवालात में, प्रेमचंद्र के साथ में। मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ है, हथकड़ियां हैं हाथ में। शायर-लेखक जब बिकने लगे, सब छोड़ कसीदे लिखने लगे, ये दोनों बेहूदा हुए, बाकी लोगों से जुदा हुए।।
इसे 04 लाख से अधिक लोगों ने देखा है।

यहां बंबई में जब एसी जोर आजमाता है, बदन कंपकंपाता है। मैं कंबल सर से ओढ़ लेता हूं और एक शख्स याद आता है। ।
इसे 01 लाख से अधिक लोगों ने देखा है।
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