पिंटू सेंगर हत्याकांड में पुलिस ने एक विधायक के इशारे और आरोपियों से अपनी नजदीकी की वजह से पूरा खेल किया। विधायक ने आरोपियों के नाम बाहर कराने के लिए पूरा जोर लगा दिया। पूरा खेल खुलने के बाद भी विधायक और उसके गुर्गे आरोपियों को बचाने के प्रयास में लगे हैं।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि डीआईजी ने मामले की नए सिरे से जांच शुरू करा दी है। पिंटू सेंगर हत्याकांड में पुलिस ने सीआरपीसी 169 के तहत मुख्य आरोपी मनोज गुप्ता और वीरेंद्र पाल को जेल से रिहा कराने को कोर्ट में रिपोर्ट लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया है।
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इसके अलावा विवेचना में आरोपी महफूज अख्तर समेत अन्य का नाम केस से बाहर कर दिया था। दावा किया कि इनके खिलाफ साक्ष्य नहीं मिले हैं। इस खेल के पीछे एक विधायक का नाम भी सामने आ रहा है। सभी आरोपी विधायक के बेहद करीबी हैं। रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही विधायक ने पैरवी शुरू कर दी थी।
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गले नहीं उतर रही पुलिस की कहानी
तत्कालीन चकेरी इंस्पेक्टर राम कुमार गुप्ता ने महफूज अख्तर का नामा निकाला। वहीं दो अन्य आरोपियों का नाम वर्तमान चकेरी इंस्पेक्टर रवि कुमार श्रीवास्तव ने बाहर किए। महफूज का नाम निकालने में उसके कर्मचारियों के बयानों को आधार बनाया गया। वहीं दो अन्य आरोपियों के मामले में तर्क दिया कि उनकी लोकेशन वहीं नहीं थी। ये तर्क पुलिस अधिकारियों के गले नहीं उतर रहे हैं।
डीआईजी से मिले परिजन, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
पिंटू सेंगर के परिजनों ने डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। पिंटू के भाई धर्मेंद्र सेंगर ने कहा कि मुख्य आरोपी मनोज गुप्ता से पिंटू को 90 लाख रुपये लेने थे। वीरेंद्र पाल ने भी प्रापर्टी के काम में पिंटू के लाखों रुपये का गबन किया था। पुलिस ने इसका जिक्र जांच में किया ही नहीं और उनको क्लीन चिट दे दी। अन्य आरोपियों का भी नाम हटा दिया। डीआईजी ने बताया कि एसपी पश्चिम जांच कर रहे हैं। जिसकी भूमिका सामने आएगी, कार्रवाई की जाएगी।