पिंटू सेंगर हत्याकांड के मुख्य आरोपी मनोज गुप्ता ने पुलिस से शामिल होने की बात कबूली थी। सीडीआर व अन्य साक्ष्यों से भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी पुलिस ने मनोज और वीरेंद्र पाल को बेगुनाह बताते हुए जेल से रिहा कराने का प्रयास किया। पुलिस की कार्यशैली में अचानक आए इस बदलाव से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
20 जून को हुई पिंटू की हत्या में पुलिस ने मुख्य आरोपी मनोज गुप्ता, वीरेंद्र पाल, पप्पू स्मार्ट के अलावा साजिशकर्ता और शूटरों समेत 14 आरोपियों को जेल भेजा है। एक अक्तूबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। साथ में पुलिस ने सीआरपीसी 169 के तहत मनोज और वीरेंद्र को निर्दोष बताकर उन्हें रिहा करने के संबंध में एक रिपोर्ट भी दाखिल की।
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बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि कोर्ट ने इसे खारिज कर दी है। कोर्ट के आदेश में मनोज के बयान का जिक्र है। पुलिस को दिए बयान में मनोज ने कहा है कि पिंटू सेंगर बहुत बड़ा गुंडा व माफिया था। विवादित जमीनों को कम दाम में खरीदकर ऊंची कीमतों में बेचता था।
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पार्टनरों का भी रुपया दबा गया था। इस वजह से वह भी परेशान था। वह भी उसकी हत्या की साजिश में शामिल था। मनोज के इस कबूलनामे को भी पुलिस ने दरकिनार कर दिया। मामले मेें चकेरी पुलिस के साथ-साथ एक-दो अफसरों की भी भूमिका संदिग्ध है। एक अफसर की तो महफूज अख्तर से बेहद नजदीकी भी रही है।
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आनन-फानन में किया पूरा खेल
पूरे मामले में एक और अहम तथ्य सामने आया है। पुलिस ने पूरी डील आनन-फानन में की। यही वजह है कि चार्जशीट में अलग से पेन से मनोज और वीरेंद्र के बारे में साक्ष्य न मिलने का दावा किया गया। यानी चार्जशीट लगने वाले दिन ही खेल किया गया।
फरार आरोपी की पैरवी करवा रहा बाहुबली का रिश्तेदार
हत्याकांड में साउद अख्तर नामजद आरोपी है, जो फरार है। वह पूर्वांचल के एक बाहुबली नेता का रिश्तेदार है। उसी की हनक में अभी तक गिरफ्तारी नहीं की गई। पुलिस उसको फरार बता रही है।