देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का आज जन्मदिन है। रामनाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिला (वर्तमान में कानपुर देहात जिला) की तहसील डेरापुर, कानपुर देहात के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था।
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रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : thefirstmail.com
कोविंद के जीवन से एक शब्द ऐसा जुड़ा उनकी तकदीर बदलकर रख दी। आज हम उसी शब्द के बारे में आप को बताने जा रहे हैं।
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रामनाथ कोविंद
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कोविंद के परिजनों और मित्रों की मानें तो उनके खास व्यक्तित्व, प्रतिभा के साथ ही ‘र’ शब्द ने उनकी तकदीर बदल दी।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्मदिन
'र' से रामनाथ के रूप में शुरू हुआ सिलसिला राज्यसभा सांसद, राज्यपाल होते हुए अब राष्ट्रपति तक जा पहुंचा है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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जीवन में पहली बार भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव में उतरने वाले रामनाथ कोविंद पूरी शिद्दत से चुनाव लड़ने के बावजूद हार गए। इस हार से वह बेहद निराश हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें।
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ramnath kovind
ऐसे समय में उनके दूसरे नंबर के बड़े भाई शिवबालक राम कोविंद (जो अब इस दुनिया में नहीं हैं) ने उन्हें पिता की तरह समझाया।
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रामनाथ कोविंद
बड़े भाई की तरफ से कही गई एक-एक बात को रामनाथ ने आशीर्वाद के रूप में ग्रहण किया। शिवबालक ने रामनाथ के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था, तुम्हारा नाम राम है।
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ramnath kovind
राम शब्द 'र' से शुरू होता है। यही र' तुम्हें जीवन में बहुत आगे ले जाएगा। आज जब रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति हो गए तो स्व. रामबालक की पत्नी और रामनाथ कोविंद की मां समान भाभी विद्यावती कोविंद की आंखें अपने पति की बातों और अपने लल्ला को याद कर खुशी से छलक पड़ीं।
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रामनाथ कोविंद-सविता कोविंद
कहने लगीं, उनके (पति) आशीर्वाद से लल्ला पहले राज्य सभा सांसद हुए (इसमें भी र है) फिर राज्यपाल (इसमें भी र) और अब राष्ट्रपति (इसमें भी र) हो गए हैं। विद्यावती की बेटी हेमलता जो इस समय अपनी मां के साथ झींझक में रहती है, उसने भी अपने चाचा (रामनाथ) के विषय में ढेर सारी बातें की।
बताया कि वह उन लोगों से जब भी मिलते हैं, खूब हंसाते हैं। पिछले महीने वह अपनी मां के साथ पटना राजभवन में दो सप्ताह तक रही। इस दौरान चाचा उन लोगों की हर पंसद का ख्याल रखते थे।