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इस कस्बे में लगातार बढ़ रही है एचआईवी के मरीजों की संख्या, अबतक 78

Sun, 27 May 2018 07:35 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमाे पिक
यूपी के उन्नाव जिले में बांगरमऊ कस्बे में एक साल के अंदर एचआईवी के 78 मामले सामने आ चुके हैं। एचआईवी पीड़ितों की बढ़ती संख्या पर स्वास्थ्य विभाग ने आईसीटीसी सेंटर पर  जांच कराने की सलाह दी थी। मामला तूल पकड़ने के बाद पीड़ितों के नाम सार्वजनिक होने लगे। लाइलाज बीमारी की चपेट में आने व नाम सार्वजनिक होने के डर से लोग कन्नौज व हरदोई के आईसीटी सेंटर पर जांच करा रहे हैं।


 
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2 फरवरी 2018 को प्रकाशित खबर की पीडीएफ - फोटो : अमर उजाला
बांगरमऊ के एक गांव निवासी युवक ने एक सप्ताह पहले कन्नौज में जांच कराई थी। जांच में उसे एचआईवी पीड़ित पाया गया। इसी तरह बांगरमऊ के एक मोहल्ले में रहने वाले बीए के छात्र ने हरदोई में अपने रिश्तेदार की मदद से सरकारी अस्पताल के आईसीटी सेंटर में जांच कराई। जांच में उसे भी एचआईवी पीड़ित पाया गया। परिजनों के अनुसार एचआईवी से पीड़ित युवकों का कानपुर के एआरटी सेंटर में उपचार शुरू हो गया है। 


 
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30 नवंबर 2017 को प्रकाशित खबर की पीडीएफ - फोटो : अमर उजाला
नवंबर 2017 में मिले थे 13 मरीज 
बांगरमऊ के प्रेमगंज में स्वास्थ्य विभाग ने नवंबर 2017 में जांच शिविर लगाया था। शिविर में पहली बार 13 मरीज एचआईवी से पीड़ित मिले थे। 24 जनवरी 2018 को दोबारा जांच शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 38 नए मरीजों की पहचान हुई थी।  अप्रैल 2017 से नवंबर 2017 तक बांगरमऊ में एचआईवी के 27 केस सामने आ चुके थे। 
 
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22 नवंबर 2017 को अमर उजाला के ब्रेक की गई खबर की पीडीएफ - फोटो : अमर उजाला
संक्रमित सुई व असुरक्षित यौन संबंध से बढ़े मामले 
एचआईवी पीड़ित मरीजों की काउंसलिंग करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार अधिकतर मरीजों ने एक झोलाछाप पर संक्रमित सुई का प्रयोग करने का आरोप लगाया था। कई मामलों में असुरक्षित यौन संबंधों की बात सामने आई थी। काउंसलिंग करने वाले कर्मियों के अनुसार बांगरमऊ के जिन क्षेत्रों में मरीज अधिक संख्या में सामने आए, वहां अधिकतर लोग बड़े शहरों में मजदूरी करते हैं। 

तीन सेंटर पर हो रही जांच
एचआईवी पीड़ित मरीजों की जिले में तीन सेंटर पर जांच की जा रही है। सेंटर हसनगंज, नवाबगंज व जिला अस्पताल में हैं। वहीं बांगरमऊ में एचआईवी के मामले सामने आने के बाद जिले में एआरटी सेंटर खोलने का आश्वासन दिया गया था। अब तक इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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