जालौन में बेतवा नदी के सालाघाट के टापू पर फंसे एट के पिरोना निवासी उन 19 लोगों को वह पल जिंदगी भर नहीं भूलेगा, जब वे पानी के बीच चारों ओर से घिरे थे, किसी को दोपहर होने तक उम्मीद नहीं थी कि अब वे दोबारा अपनों से मिल पाएंगे, ऐसा लग रहा था कि टापू में ही उनकी जलसमाधि बन जाएगी, लेकिन शाम होते ही प्रशासन ने जब फंसे लोगों की सुध ली तो सूरज डूबने के साथ ही जिंदगी की एक नई किरण चमक उठी।
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मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
डीएम मन्नान अख्तर, एसपी सतीश कुमार और स्वयं सांसद भानु प्रताप की वहां पर मौजूदगी होने से बचाव कार्य शुरू हो गया। देखते ही देखते पीएसी और एनडीआरएफ की टीमें टापू के दूसरी ओर पहुंची और फिर शुरू हुआ रेस्क्यू, जिसने एक घंटे के भीतर ही टापू में फंसे लोगों को मोटर बोट के सहारे मौत के मुंह से खींच लिया। अपनों के पास पहुंचे इन लोगों के चेहरों पर चौबीस घंटे बीतने के बाद दहशत के भाव साफ दिख रहे थे, प्रस्तुत है उनकी ही जुबानी, टापू में बिताए पल की कहानी।
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अचानक पानी बढ़ने से बीच नदी में फंसे 19 लोग
- फोटो : अमर उजाला
खत्म हो रहा था खाना और पानी
टापू से निकले पिरौना निवासी बब्लू यादव ने बताया कि भंडारे का अधिकांश खाना सोमवार की रात को ही खत्म हो गया था, क्योंकि मंगलवार को दोबारा सामान लेने जाना था। यदि एक भी रात और काटनी पड़ जाती तो शायद पानी के बीच भूखे मरने की नौबत आ जाती। घर पहुंचते ही मां सुरजन और पिता नाथूराम ने बब्लू को गले से लगा लिया। पत्नी संगीता और बच्चे अतुल (17), अंजलि (13) तो काफी देर तक बबलू से लिपटकर रोते ही रहे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि बबलू मौत के मुंह से वापस आ गया है।
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रोशनी का इंतजाम किया गया
- फोटो : अमर उजाला
शाम को लगा कि अब बच जाएगी जान
आईटीआई सेकेंड ईयर के छात्र शिवम ने बताया कि जब अधिकारी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य के प्रयास शुरू होने की जानकारी टापू पर पहुंची, तब जाकर हमें लगा कि अब जान बच जाएगी, वर्ना पहले तो सभी हताश हो चुके थे। घर लौटने पर मां मीरा तो बार-बार बेटे शिवम का माथा ही चूमती रही और आंखों में आंसू भरकर पिता संतराम दिखावे के लिए उसे डांटते रहे कि किसने कहा था टापू में जाने के लिए। वहीं शिवम का छोटा भाई सचिन तो उसका हाथ ही नहीं छोड़ रहा था। फिलहाल उसके लौटने पर सभी ने राहत की सांस ली।
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मौके पर एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें
- फोटो : अमर उजाला
ठीक वक्त पर काम आया सोशल मीडिया
बीए प्रथम वर्ष के छात्र चंद्रपाल ने बताया कि करीब 24 घंटे रहने के बाद उसका दिमाग काम किया और उसने सभी का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। यूं तो 100 नंबर पर भी सूचना दी गई थी लेकिन वायरल वीडियो ने तेजी से काम किया और प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए। चंद्रपाल अपनी मां सुनीता का एकलौता बेटा है। उसे अपनी आंखों के सामने देख मां के आंसू छलक उठे। उसने भी गले लगकर मां की पीठ पर हाथ रखते हुए कहा कि देखो कुछ भी तो नहीं हुआ है, यह देख आसपास खड़े लोगों की आंख भी नम हो गई।
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जवान नहीं हम तो हनुमान ही मानेंगे
टापू से निकले दशरथ, प्रहलाद, अमर सिंह, धीरेंद्र आदि का कहना है कि एनडीआरएफ के जवानों ने जिस जांबाजी से उन सभी को सकुशल बाहर निकाला, हम सभी के लिए तो वे जवानों मानों हनुमान बनकर आए थे। उस पर प्रशासन के प्रयास के भी अनदेखा नहीं कर सकते। पानी के बीच फंसे लोगों को तो लग रहा था कि यदि मंगल की रात और वहां बितानी पड़ा तो वह उन सभी की आखिरी रात भी हो सकती है। ऐन वक्त पर भगवान ने सुन ली और सभी अपनों के बीच सकुशल लौट पाए।
एक स्टीमर खराब होने पर छूटा पसीना
एनडीआरएफ व पीएससी के मिलाकर तीन मोटर बोट मौके पर लाई गई थी। अचानक एक मोटरबोट खराब होने से एक बार जवानों को भी मिशन कुछ मुश्किल लगा लेकिन रेस्क्यू नहीं रोका गया और फिर दो मोटर बोट से ही तीन बार में सभी फंसे 19 लोगों को न सिर्फ सकुशल बाहर निकाला गया बल्कि डीएम, एसपी और सांसद ने सभी के लिए वहीं पर खाने पीने का इंतजाम भी किया। फंसे लोगों की मानें तो जवान किसी अपने की तरह फिक्रमंद उन्न सभी को बड़ी सावधानी और स्नेहपूर्वक लेकर लौटे।