नुमाइश पंडाल या नेताजी मुलायम सिंह यादव की कोठी पर जनसैलाब पहली बार नहीं था। ऐसे कई मौकों का गवाह सैफई बना हुआ है। इस बार कोठी का हॉल भी वही था...पंडाल का मंच भी वही...बस नहीं थे तो लोगों की समस्याओं सुनने वाले जननायक। मुलायम सिंह यादव नए आवास के हॉल में ही अक्सर बैठते थे। यहीं पर बैठकर समस्याएं भी सुनते थे और लखनऊ से लेकर दिल्ली तक फोन करके उनका समाधान भी कराते थे। सोमवार शाम से लेकर मंगलवार सुबह तक नेता जी पार्थिव शरीर इसी हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। दो दिन तक लोग उनके दर्शन को बेताब भी रहे। हॉल में दर्शन करने भी गए, लेकिन इस बार नेता जी का मुस्कुराता चेहरा नहीं था।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सपा के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव, प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव सब थे, पर सबके मसीहा मुलायम सिंह यादव चुप थे। सबकी आंखों में आंसू और नेता जी का चेहरा था।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
यही हाल नुमाइश पंडाल का था। यहां सुबह पौने 11 बजे पहुंचे अंतिम यात्रा का रथ देखकर पूरा पंडाल नारों से गूंज उठा। बस अब नारे नेता जी जिंदाबाद की जगह नेता जी अमर रहें के थे। नेता जी मंच पर लाए तो गए, लेकिन वह शांत थे। लोग याद करके फफक रहे थे।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मार्च में होली का दिन याद करके उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। ग्राम प्रधान राफल वाल्मीकि ने बताया कि वैसे तो हर बार होली का उत्सव नेता जी के आवास पर ही मनाया जाता था, लेकिन नेता जी इच्छा पर इस बार होली महोत्सव पहली बार नुमाइश पंडाल में आयोजित किया गया था।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : ट्विटर
नेता जी होली पर बहुत खुश थे...उन्होंने सबके साथ फूलों की होली खेली थी, लेकिन मंगलवार को मंच पर नेता जी शांत लेटे थे। हमारे मसीहा हमेशा के लिए चुप हो गए हैं।
पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
डेढ़ माह से सेवा कर रहे थे धर्मेंद्र, रह-रह कर हो रहे थे बेसुध
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तबीयत करीब डेढ़ माह पहले बिगड़ गई थी। तब से उनके भतीजे और बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव मेदांता में ही उनकी सेवा कर रहे थे। सोमवार को उनके निधन की सूचना भी उन्होंने सैफई में पिता अभयराम यादव को फोन करके रोते हुए दी थी। सोमवार को मेदांता से एंबुलेंस में भी बैठकर धर्मेंद्र खुद आए थे। उनका रो-रोकर बुरा हाल था। मंगलवार को भी घर और मंच पर उनके आंसू रुक नहीं रहे थे।