चलती फिरती हुई आंखों से अजां देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी मां देखी है। वैसे तो मां शब्द को शब्दों में बांध पाना असंभव है। लेकिन मुनव्वर राना का यह शेर मां की अपार शक्ति और ममता को दर्शाता है। बच्चे के लिए मां हर मुश्किल से लड़ सकती है, हर दर्द सह सकती है। रविवार को मदर्स डे है, इसी क्रम में हम आपको कुछ ऐसी मां की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को मुकाम तक पहुंचाने के लिए संघर्षों का पहाड़ लांघा है।
24 साल की मेहनत और दिव्यांग बेटा बना सॉफ्टेवयर इंजीनियर
अनंत जब पैदा हुआ, तो उसके हाथ और पैर मुड़े हुए थे, ज्यादा रो भी नहीं रहा था। उसके हाथ पैर को सीधा करने के चक्कर में एक पांव टूट गया और कुछ घंटे के बच्चे को प्लास्टर चढ़ गया। डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि बच्चा कभी चल नहीं पाएगा। उसको ऑर्थोपेडिक मल्टीप्लेक्स बीमारी थी। दो बेटियों के बाद बेटे का जन्म और इस अवस्था में, आंसू रुक नहीं रहे थे। जैसे ही उसे गोद में लिया तो ठान लिया कि कैसे भी हो, बच्चे को अच्छे मुकाम तक पहुंचाऊंगी।